होमAn overview of the concept of drafting and its general principlesप्रारूपण की अवधारणा और इसके सामान्य सिद्धांतों का अवलोकन

प्रारूपण की अवधारणा और इसके सामान्य सिद्धांतों का अवलोकन

प्रारूपण की अवधारणा और इसके सामान्य सिद्धांतों का अवलोकन

यह लेख Prince Ilango द्वारा लिखा गया है जो लॉसिखो से कानूनी प्रारूपण: अनुबंध, याचिकाएं, राय और लेखों के परिचय में सर्टिफिकेट कोर्स कर रहे हैं।  इस लेख में प्रारूपण (ड्राफ्टिंग) की अवधारणा और इसके सामान्य सिद्धांतों पर चर्चा की गई है। इस लेख का अनुवाद Divyansha Saluja के द्वारा किया गया है।

परिचय

कानूनी दस्तावेज़ का मसौदा तैयार करना एक कौशल है जिसे बहुत अभ्यास के माध्यम से ही हासिल किया जा सकता है। मसौदा तैयार करने का मतलब कानूनी दस्तावेज को कलम और कागज से या कंप्यूटर, लैपटॉप या अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का उपयोग करके लिखने की प्रक्रिया है, लेकिन जब कानूनी सिद्धांतों की बात आती है तो मसौदे का लक्ष्य सटीक और संक्षिप्त होने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए और उन तथ्यो तक सीमित होना चाहिए जो उस विशेष स्थिति या मुद्दे से संबंधित या प्रासंगिक हैं, जिसके लिए मसौदा तैयार किया जा रहा है। ऐसे दस्तावेज़ों का मसौदा तैयार करने के लिए कानूनी ज्ञान की आवश्यकता होती है और जो व्यक्ति उनका मसौदा तैयार करता है उसे मसौदे की संरचना के बारे में पता होना चाहिए क्योंकि गलतियों से बचने या उचित मसौदा बनाने के लिए मसौदा तैयार करते समय कई कारकों पर विचार करना पड़ता है। एक रूपरेखा का निर्माण, तथ्यों की व्यवस्था, शैली और भाषा, और मसौदे में प्रयुक्त शब्द – ये सभी एक आदर्श मसौदा बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। अधिकतर, ये मसौदा अधिवक्ताओं और कानूनी क्षेत्र में अच्छा ज्ञान रखने वाले लोगों द्वारा तैयार किए जाते हैं। अंतिम मसौदा बनाने से पहले कई मसौदे तैयार किये जाते हैं; इसका उद्देश्य मसौदा को होने वाली किसी भी संभावित गलती से बचने में मदद करना है और साथ ही मसौदा को छोटा और सटीक बनाना है, जो इसकी सभी आवश्यकताओं को पूरा करता है। कानूनी दस्तावेज़ का मसौदा तैयार करने में अनुबंध, दलीलें, राय, समझौते और इसी तरह के कानूनी उपकरणों का मसौदा तैयार करना शामिल है।

मसौदा क्या है

सामान्य तौर पर मसौदा का मतलब मूल स्थिति में पाठ का एक टुकड़ा या एक चित्र होता है, जिसमें अक्सर मुख्य विचार और इरादे होते हैं लेकिन विकसित या पूर्ण नहीं होते हैं। दूसरे शब्दों में, यह लेखन का एक टुकड़ा है जिसे सुधारना है और अंतिम संस्करण नहीं है। एक मसौदे को किसी कार्य के मोटे नोट्स के रूप में एक रूपरेखा के रूप में भी समझाया जा सकता है जिसे बाद में पूरा किया जाएगा। उदाहरण के लिए दस्तावेज़ लिखना, पत्र, भाषण योजना, डिज़ाइन ड्राइंग इत्यादि।

मसौदा हस्तलिखित नोट्स से लेकर टाइप की गई पांडुलिपियों (मनुस्कृप्त) तक कई रूप ले सकते हैं। उन्हें औपचारिक से लेकर अनौपचारिक तक विभिन्न शैलियों में लिखा जा सकता है। मसौदे का उद्देश्य विचारों को कागज पर उतारना है ताकि उन्हें व्यवस्थित किया जा सके और एक सुसंगत लेखन के रूप में विकसित किया जा सके।

मसौदा लिखने के कई फायदे हैं। सबसे पहले, यह लेखक को अपेक्षाकृत असंरचित तरीके से अपने विचारों को कागज पर उतारने की अनुमति देता है। यह विचार-मंथन और नए विचारों के साथ आने में सहायक हो सकता है। दूसरा, एक मसौदा लेखक को उनके लेखन की समग्र संरचना को देखने और उन क्षेत्रों की पहचान करने में मदद कर सकता है जिन्हें विकसित या संशोधित करने की आवश्यकता है। तीसरा, मसौदा का उपयोग दूसरों, जैसे शिक्षकों, संपादकों या साथियों से प्रतिक्रिया प्राप्त करने के लिए किया जा सकता है। इस फीडबैक का उपयोग, लेखन की गुणवत्ता में सुधार के लिए किया जा सकता है।

बेशक, मसौदा लिखने से जुड़ी कुछ चुनौतियाँ भी हैं। सबसे पहले, मसौदा पर शुरुआत करना मुश्किल हो सकता है, खासकर अगर लेखक कार्य से अभिभूत महसूस कर रहा हो। दूसरा, मसौदा लिखते समय ध्यान केंद्रित और प्रेरित रहना मुश्किल हो सकता है। तीसरा, यह जानना मुश्किल हो सकता है कि मसौदा कब तैयार हो गया है और संशोधित होने के लिए तैयार है।

चुनौतियों के बावजूद, मसौदा लिखना लेखन प्रक्रिया में एक आवश्यक कदम है। यह वह नींव है जिस पर लेखन का अंतिम टुकड़ा बनाया जाएगा। मसौदा लिखने के लिए समय निकालकर, लेखक अपने लेखन की गुणवत्ता में सुधार कर सकते हैं और अधिक परिष्कृत (पॉलिश्ड) और पेशेवर कृति तैयार कर सकते हैं।

प्रारूपण क्या है

प्रारूपण शब्द का अर्थ दस्तावेज़ का प्रारंभिक संस्करण तैयार करना है। कानूनी प्रारूपण को किसी कानूनी दस्तावेज पर कानूनी भाषा में कानून, उसके घटकों, तथ्यों और अन्य संबंधित सामग्री के संग्रह के रूप में परिभाषित किया जा सकता है। कानून, तथ्य और भाषा कानूनी प्रारूपण के तीन मुख्य घटक हैं। कानूनी प्रारूपण कानूनी दस्तावेजों जैसे अनुबंध, नोटिस आदि की तैयारी है। प्रारूपण को बेहतर ढंग से समझने के लिए, आइए प्रारूपण में शामिल चरणों पर गौर करें, जिन्हें नीचे समझाया गया है।

प्रारूपण में शामिल चरण

कानूनी दस्तावेज़ का मसौदा तैयार करने में मूल रूप से तीन मुख्य चरण शामिल होते हैं, जो इस प्रकार हैं:

पहला मसौदा

इसमें हर वह विवरण शामिल है जो मसौदा तैयार करने वाला व्यक्ति उस दस्तावेज़ के लिए आवश्यक समझता है, जो अंततः पहले मसौदे को दूसरे और तीसरे मसौदे की तुलना में लंबा बनाता है। पहले मसौदे के बारे में एक कहावत है, “पहले मसौदे में वह सब कुछ होता है जो आप कहने का सोचते है लेकिन अंतिम मसौदे में केवल वह सब कुछ होता है जो आप कहना चाहते थे।”

दूसरा मसौदा

इस चरण में, संपादन भाग शुरू होता है। अंतिम मसौदा बनाने में दूसरा मसौदा महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जो कुछ भी हटाना या जोड़ना होता है वह मसौदे के इसी चरण में किया जाता है।

अंतिम मसौदा

अंतिम मसौदे का उद्देश्य ग्राहक, अदालत या किसी भी संबंधित पक्ष को समझाने में सटीकता और प्रभावशीलता है।

इस पूरी प्रक्रिया के दौरान, प्रत्येक एक शब्द, कानूनी शब्द, अधिनियम, धारा और अन्य संबंधित मामला जो उस विशेष मसौदे में होना चाहिए जिसके लिए मसौदा बनाया जा रहा है वह सटीक होना चाहिए और मसौदे की आवश्यकताओं को पूरा करने में सक्षम होना चाहिए। मसौदे को समान रूप से फर्म, कंपनी, व्यक्ति या किसी अन्य व्यक्ति के लिए इसे और अधिक समझने योग्य बनाने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए, जिसका मसौदा के साथ संबंध है।

मसौदा में शामिल शब्दावली

मसौदा बनाने वाला: वह व्यक्ति है जो पट्टे (लीज), बंधक विलेख (मॉर्गेज डीड), उपहार विलेख, वसीयत और अन्य दस्तावेजों जैसे मसौदा /दस्तावेज बनाता या खींचता है।

ड्रैगोमैन: वह व्यक्ति जो दलीलों और अन्य लेखों की व्याख्या करता है; एक पेशेवर दुभाषिया (इंटरप्रेटर)। 

भारतीय संविधान के तहत प्रारूपण से संबंधित विभिन्न कानून हैं:

  1. भारत का संविधान
  2. कंपनी अधिनियम 1956
  3. 2013 का कंपनी अधिनियम
  4. 1872 का भारतीय साक्ष्य अधिनियम
  5. 1872 का भारतीय संविदा अधिनियम
  6. 1889 का भारतीय स्टाम्प अधिनियम
  7. 1908 का पंजीकरण अधिनियम
  8. 1882 का संपत्ति हस्तांतरण अधिनियम

कानून जो अनुबंध प्रारूपण से संबंधित हैं

इन कानूनों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अनुबंध निष्पक्ष, पारदर्शी और कानूनी रूप से बाध्यकारी हों। यहां कुछ प्रमुख कानून हैं जो भारत में अनुबंध प्रारूपण से संबंधित हैं:

  1. भारतीय अनुबंध अधिनियम, 1872: यह भारत में अनुबंधों के निर्माण, व्याख्या और प्रवर्तन को नियंत्रित करने वाला प्राथमिक कानून है। यह एक वैध अनुबंध के आवश्यक तत्वों को निर्धारित करता है, जिसमें प्रस्ताव, स्वीकृति, विचार, क्षमता और उद्देश्य की वैधता शामिल है।
  2. माल की बिक्री अधिनियम, 1930: यह कानून विशेष रूप से माल की बिक्री के अनुबंधों से संबंधित है। यह खरीदारों और विक्रेताओं दोनों के अधिकारों और दायित्वों पर विस्तृत प्रावधान प्रदान करता है, जिसमें स्वामित्व का हस्तांतरण, भुगतान की शर्तें, वितरण और अनुबंध के उल्लंघन के उपाय शामिल हैं।
  3. विशिष्ट राहत अधिनियम, 1963: यह कानून अनुबंध के उल्लंघन के लिए उपचार प्रदान करता है, जैसे विशिष्ट प्रदर्शन, निषेधाज्ञा और क्षति। यह उन शर्तों को भी निर्धारित करता है जिनके तहत ये उपचार दिए जा सकते हैं।
  4. मध्यस्थता (मीडियेशन) और सुलह अधिनियम, 1996: यह कानून मध्यस्थता और सुलह के माध्यम से विवादों के समाधान के लिए एक रूपरेखा प्रदान करता है। यह मध्यस्थों की नियुक्ति, मध्यस्थता कार्यवाही संचालित करने और मध्यस्थता पंचाटो (अवार्ड) को लागू करने की प्रक्रियाएं निर्धारित करता है।
  5. सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000: यह कानून इलेक्ट्रॉनिक अनुबंधों और लेनदेन को नियंत्रित करता है। यह इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर और डिजिटल दस्तावेज़ों के लिए कानूनी मान्यता प्रदान करता है और इलेक्ट्रॉनिक अनुबंधों के गठन और वैधता के लिए शर्तें निर्धारित करता है।
  6. उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019: इस कानून का उद्देश्य उपभोक्ताओं को अनुचित व्यापार प्रथाओं और दोषपूर्ण वस्तुओं और सेवाओं से बचाना है। यह उपभोक्ता विवादों के निपटारे के लिए उपभोक्ता अदालतों और न्यायाधिकरणों की स्थापना का प्रावधान करता है।

ये कानून, दूसरों के बीच, भारत में अनुबंधों के प्रारूपण और प्रवर्तन के लिए एक व्यापक कानूनी ढांचा प्रदान करते हैं। इन कानूनों को समझने और उनका अनुपालन करके, व्यवसाय और व्यक्ति यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि उनके अनुबंध कानूनी रूप से वैध और लागू करने योग्य हैं।

प्रारूपण के सिद्धांत

मुख्य रूप से चार मूलभूत सिद्धांत हैं जो प्रारूपण को नियंत्रित करते हैं; वे नीचे सूचीबद्ध हैं: 

एक संतोषजनक रूपरेखा

एक मसौदे को किसी भी दस्तावेज़ का ढांचा माना जाता है, या दूसरे शब्दों में, इसे दस्तावेज़ों का कंकाल माना जाता है, इसलिए एक पूर्ण मसौदे को समझना आसान होना चाहिए और इसमें शामिल सभी प्रासंगिक विवरणों के साथ विस्तृत भी होना चाहिए, क्योंकि यदि मसौदा में अनुबंध या समझौते के बारे में कोई खंड या कुछ महत्वपूर्ण जानकारी गायब हो जाती है, तो यह अंतिम मसौदा नहीं होगा और जिस व्यक्ति को उस मसौदा की आवश्यकता होगी, वह मसौदा बनाने वाला या किसी भी व्यक्ति जिसने उस विशेष दस्तावेज़ या अनुबंध का मसौदा तैयार किया है के काम से खुश नहीं होगा। इसलिए यह हमेशा महत्वपूर्ण है कि क्या किया जाना चाहिए। इसकी एक संतोषजनक रूपरेखा होनी चाहिए और यह विचार होना चाहिए कि मसौदा पूरा होने पर कैसा दिखना चाहिए।

तथ्यों की सावधानीपूर्वक व्यवस्था

तथ्यों को अच्छे तरीके से व्यवस्थित किया जाना चाहिए। अच्छे व्यवहार से तात्पर्य यह है कि तथ्यों को तथ्य के महत्व के अनुसार चरण दर चरण व्यवस्थित किया जाना चाहिए, जिससे यह समझना और जानना आसान हो जाएगा कि मुद्दा क्या और कहां है या कंपनियों के लिए पहली बार में अनुबंधों को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिल सकती है, जो समय की बचत होगी और भविष्य में अनुबंध या समझौते से संबंधित समस्याओं से बचा जा सकेगा।

स्पष्ट शैली (स्टाइल) और भाषा

मसौदा बनाते समय व्याकरण की गलतियाँ, वर्तनी की गलतियाँ, अधिनियमों और धाराओं में गलतियाँ, कानूनी कहावतों में गलतियाँ, गलत विराम चिह्न, कानूनी शब्दों में गलतियाँ और ऐसी अन्य गलतियों से बचना चाहिए। कुल मिलाकर, मसौदा बिना किसी गलती के दोषरहित होना चाहिए। सरल शैली का प्रयोग करना चाहिए ताकि मसौदा के विचारों को मसौदा पढ़ने वाले व्यक्ति तक स्थानांतरित करने में कोई समस्या न हो।

भौतिक विशेषताएं

मसौदा को मानक गुणवत्ता वाले कागज (20 x 30 सेंटी मीटर) पर टाइप किया जाना चाहिए, जिसमें ऊपर बाईं ओर 4 सेंटी मीटर और दाईं ओर और नीचे 2.5 से 4 सेंटी मीटर का मार्जिन होना चाहिए।

प्रत्येक पृष्ठ की संख्या, रोमन संख्याओं में प्रारंभिक संख्याओं की संख्या (i, ii, iii) और अरबी में मुख्य पाठ (1, 2, 3, आदि) पृष्ठों की संख्या ऊपरी दाएं कोने में दिखाई देनी चाहिए, ऊपर से 2.5 सेंटी मीटर और दस्तावेज़ का मुख्य भाग सामान्य रूप से दोगुने स्थान पर होना चाहिए। प्रत्येक पैराग्राफ को पांच स्थानों से इंडेंट किया जाना चाहिए और प्रत्येक पैराग्राफ को क्रमांकित किया जाना चाहिए। सभी शीटों को मजबूती से एक साथ बांधा जाना चाहिए।

प्रारूपण के नियम

प्रारूपण करते समय जिन नियमों का पालन किया जाना चाहिए वे हैं:

  • किसी भी तथ्य को टाला नहीं जाना चाहिए; यह एक महत्वपूर्ण नियम है जिसका पालन प्रत्येक व्यक्ति को करना चाहिए जो किसी दस्तावेज़, समझौते, विलेख या ऐसे किसी दस्तावेज़ का मसौदा तैयार करता है।
  • कानूनी शब्दों का प्रयोग उचित स्थानों पर किया जाना चाहिए।
  • नकारात्मक बयानों से बचना चाहिए।
  • किसी छूटे हुए तथ्य या गलती की जांच के लिए तैयार मसौदे को कई बार पढ़ा जाना चाहिए।
  • एक मसौदे को अनुबंध या समझौते की आवश्यकताओं के अनुसार कई पैराग्राफों में विभाजित किया जाना चाहिए।
  • प्रयोग किये जाने वाले शब्दों का चयन विनम्र होना चाहिए।
  • ऊपर उल्लिखित सभी शारीरिक विशेषताओं का कड़ाई से पालन किया जाना चाहिए। 

निष्कर्ष

निष्कर्ष के तौर पर, मसौदा सटीक और स्पष्ट होना चाहिए। विषय वस्तु के बारे में उचित ज्ञान रखने वाले व्यक्ति को मसौदे को पूरी तरह से समझने में सक्षम होना चाहिए। मसौदा तैयार करने का कौशल कानूनी क्षेत्र में सफल पेशे का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। प्रारूपण में बहुत अभ्यास करना और प्रारूपण के तरीके में किसी भी सुधार के लिए किसी वरिष्ठ से सुझाव मांगना किसी भी व्यक्ति के लिए मददगार होगा जो प्रारूपण का कौशल हासिल करना चाहता है। प्रत्येक तथ्य पर अत्यधिक ध्यान दिया जाना चाहिए और मसौदा दस्तावेज़ के संबंध में निकट भविष्य में किसी भी कानूनी समस्या से बचने के लिए इसे शामिल किया जाना चाहिए। एक मसौदे को उसकी सभी जरूरतों को पूरा करना चाहिए और एक आम आदमी या ग्राहक द्वारा भी समझा जाना चाहिए, क्योंकि एक अनुबंध या समझौता शामिल पक्षों के हस्ताक्षर के बिना मान्य नहीं है। एक मसौदे में किसी अनुबंध या समझौते में शामिल दोनों पक्षों के लाभ के लिए व्यापार रहस्य या ऐसी गोपनीय जानकारी बनाए रखने के लिए एक गोपनीयता खंड भी शामिल हो सकता है। यह सुनिश्चित करना भी महत्वपूर्ण है कि समझौता या अनुबंध शून्य (अमान्य) न हो जाए। ऐसी गलतियों से बचना चाहिए, जिससे समझौता या अनुबंध रद्द हो जाए। कोई भी समझौता या अनुबंध जो कानून के तहत अवैध है, शून्य हो जाता है। इसलिए, मसौदा तैयार करते समय, किसी को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उस विशेष समझौते, अनुबंध, विलेख या ऐसे किसी दस्तावेज़ में कोई अवैध मामला शामिल नहीं है। उपरोक्त सभी नियमों और प्रारूपों का उपयोग एक उचित मसौदा तैयार करने के लिए किया जाना चाहिए और जैसा कि मैंने पहले उल्लेख किया है, मसौदा तैयार करने के कौशल में महारत हासिल करने के लिए बहुत सारा अभ्यास महत्वपूर्ण है। आपके प्रारूपण कौशल को कैसे बेहतर बनाया जाए, इस पर कई वेबसाइटें और किताबें हैं। कोई भी व्यक्ति प्रारूपण में स्वयं को बेहतर बनाने के लिए इन स्रोतों का उपयोग कर सकता है।

संदर्भ

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