होमCalculation of Depreciation under the Income Tax Act 1961आयकर अधिनियम 1961 के तहत मूल्यह्रास की गणना

आयकर अधिनियम 1961 के तहत मूल्यह्रास की गणना

आयकर अधिनियम 1961 के तहत मूल्यह्रास की गणना

यह लेख यूपीईएस स्कूल ऑफ लॉ, देहरादून से तीसरे वर्ष के विधि छात्र Avinash Kumar द्वारा लिखा गया है। इस लेख में, उन्होंने “आयकर अधिनियम 1961 के तहत मूल्यह्रास (डेप्रिसिएशन) की गणना” पर चर्चा की है। वह आयकर अधिनियम के तहत लिखित मूल्य पद्धति और अतिरिक्त (अड़िश्नल) मूल्यह्रास पर भी चर्चा करते हैं। इसका अनुवाद Pradyumn Singh के द्वारा किया गया है। 

परिचय

आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 32 में मूल्यह्रास की अनुमति का प्रावधान है और इसे आयकर नियमों के नियम 5 के तहत विनियमित किया जाता है। जब निर्धारिती  द्वारा उपयोग की जाने वाली मूर्त (टेंजिबल) या अमूर्त (इनटेंजिबल) संपत्ति (असेट्स) के मूल्य में गिरावट होती है, तो आयकर अधिनियम के तहत कटौती की अनुमति है। जबकि कटौती के समय, आयकर विभाग संपत्ति के जीवन काल में संपत्ति की कुल लागत पर मूल्यह्रास की गणना करता है। एक निर्धारिती  सीधी रेखा विधि या लिखित रेखा विधि (डब्ल्यूएलएम) के तहत मूल्यह्रास के कारण कटौती की गणना कर सकता है। आयकर विभाग लिखित रेखा विधि (डब्ल्यूएलएम) की अवधारणा का उपयोग करता है। हालांकि, मूल्यह्रास काटते समय, बिजली का उत्पादन या वितरण,में कटौती के समय,आयकर विभाग “अतिरिक्त सामान्य विधि” की अवधारणा का उपयोग करता है। कुछ परिस्थितियों में, आयकर अधिनियम खरीद के वर्ष में अतिरिक्त मूल्यह्रास की कटौती की अनुमति देता है।

आयकर अधिनियम के तहत मूल्यह्रास का अर्थ

आयकर अधिनियम 1961 के धारा 32 में मूल्यह्रास के बारे में बात की गई है। मूल्यह्रास को संपत्ति की टूट-फूट के कारण संपत्ति के मूल्य में कमी के रूप में परिभाषित किया गया है। लोग मूल्यह्रास की कटौती का दावा केवल लेखांकन (अकाउंटिंग) या कराधान (टैक्सेशन) के उद्देश्य से करते हैं।

आयकर अधिनियम 1961 मूर्त संपत्ति और अमूर्त संपत्ति के मूल्यह्रास की अनुमति देता है। मूर्त संपत्ति के मामले में, आप भवन, संयंत्र और मशीनरी के खिलाफ कटौती का दावा कर सकते हैं। अमूर्त संपत्ति के मामले में, आप पेटेंट,व्यापार चिन्ह (ट्रेडमार्क), कॉपीराइट, लाइसेंस, फ्रेंचाइजी या समान प्रकृति के किसी अन्य व्यवसाय या वाणिज्यिक अधिकार के खिलाफ कटौती का दावा कर सकते हैं। आप उन संपत्तियों पर मूल्यह्रास पर कटौती का दावा कर सकते हैं जिनका उपयोग निर्धारिती  द्वारा पिछले वर्ष के दौरान व्यवसाय या पेशे के उद्देश्य से किया गया है।

यदि किसी संपत्ति का उपयोग 180 दिनों से अधिक समय तक किया गया है तो उस वर्ष में 50% मूल्यह्रास की अनुमति है। मूल्यह्रास के तहत कटौती के लाभ का लाभ उठाने के लिए, यह अनिवार्य नहीं है कि संपत्तियों का उपयोग पिछले वर्ष में निर्धारिती  द्वारा किया गया हो। यदि किसी संपत्ति को निर्धारिती  द्वारा खरीदा जाता है और फिर पट्टेदार को पट्टे पर दिया जाता है, तो निर्धारिती  आयकर अधिनियम के तहत मूल्यह्रास की कटौती का दावा कर सकता है।  

मूल्यह्रास की दरें

निम्नलिखित संपत्तियों पर मूल्यह्रास की दरें:

  • आवासीय उपयोग के लिए भवन: 5%;  
  • गैर-आवासीय उपयोग के लिए भवन: 10%;
  • फर्नीचर और फिटिंग: 10%;
  • सॉफ्टवेयर सहित कंप्यूटर: 40%;
  • संयंत्र और मशीनरी: 15%;
  • व्यक्तिगत उपयोग के लिए मोटर वाहन: 15%;
  • व्यावसायिक उपयोग के लिए मोटर वाहन: 30%;
  • जहाज: 20%;
  • विमान: 40%;
  • सभी अमूर्त संपत्तियाँ: 25%। 

आप विभिन्न संपत्तियों पर मूल्यह्रास दर के बारे में अधिक जान सकते हैं।

आयकर के तहत मूल्यह्रास का दावा करने की शर्त

मूल्यह्रास पर कटौती का लाभ उठाने के लिए, एक निर्धारिती को कुछ शर्तों को पूरा करना होगा। ये शर्तें इस प्रकार हैं:

  • संपत्ति का वर्गीकरण: मूल्यह्रास का लाभ उठाने के लिए, संपत्ति का मालिक एक निर्धारिती (असेससी) होना चाहिए। संपत्ति मूर्त या अमूर्त हो सकती है। एक मूर्त संपत्ति के संबंध में, संपत्ति एक इमारत, मशीनरी, संयंत्र या फर्नीचर होनी चाहिए।अमूर्त संपत्ति के संबंध में, संपत्ति पेटेंट अधिकार, कॉपीराइट, व्यापार चिन्ह, लाइसेंस, फ्रेंचाइजी या किसी समान प्रकृति की होनी चाहिए जो 1.04.1998 को या उसके बाद अर्जित की गई हो। भवन पर मूल्यह्रास की गणना करते समय, आयकर विभाग केवल भवन पर मूल्यह्रास की गणना करता है। वे उस जमीन की कीमत की गणना नहीं करते जिस पर इमारत स्थित है। भवन में भूमि की लागत शामिल न करने के पीछे कारण यह है कि टूट-फूट या उसके उपयोग के कारण भूमि का कोई मूल्यह्रास न हो। 
  • स्वामित्व और पट्टा में अंतर : एक निर्धारिती केवल उन पूंजीगत संपत्तियों पर मूल्यह्रास का दावा कर सकता है जो उसके स्वामित्व में हैं। यदि निर्धारिती भवन के मूल्यह्रास पर कटौती का लाभ उठाना चाहता है तो निर्धारिती को उन भवनों का मालिक होना चाहिए। यह आवश्यक नहीं है कि निर्धारिती  उस भूमि का स्वामी हो। यदि किसी निर्धारिती ने भवन का निर्माण किया है लेकिन भूमि किसी और की है तो उसे भवनों पर मूल्यह्रास की कटौती का दावा करने का अधिकार है। यदि निर्धारिती किरायेदार है या इमारत का उपयोग कर रहा है तो वह कटौती का दावा नहीं कर सकता है। यदि किसी निर्धारिती ने भूमि का पट्टा लिया है और उस भूमि पर एक भवन का निर्माण किया है, तो वह मूल्यह्रास भत्ते का लाभ उठाने का हकदार है। किराये और खरीद के मामले में, यदि कोई निर्धारिती थोड़े समय के लिए मशीनरी किराए पर लेता है, तो उस स्थिति में, वह कटौती का दावा करने का हकदार नहीं है। लेकिन, खरीद के मामले में, यदि कोई निर्धारिती संपत्ति का अधिग्रहण (एक्वायर) करता है और संपत्ति का मालिक बन जाता है तो वह कटौती का दावा करने का हकदार है।
  • पेशे या व्यवसाय के प्रयोजन के लिए उपयोग किया जाता है: मूल्यह्रास भत्ते का लाभ उठाने के लिए यह आवश्यक है कि संपत्ति का उपयोग व्यवसाय या पेशे के उद्देश्य से किया गया हो। हालांकि, मूल्यह्रास के लिए भत्ते का लाभ उठाना आवश्यक नहीं है, जिसके लिए एक निर्धारिती को पूरे लेखांकन वर्ष में संपत्ति का उपयोग करना होगा। इस प्रकार, यदि निर्धारिती ने एक लेखांकन वर्ष में छोटी अवधि के लिए संपत्ति का उपयोग किया है तो वह मूल्यह्रास के लिए भत्ते का लाभ उठाने का हकदार है। आप किसी मौसमी कारखाने का उदाहरण ले सकते हैं। आइए चीनी कारखानों का उदाहरण लेते है। चीनी कारखाने पूरे वर्ष नहीं खुलते हैं, लेकिन यदि किसी कारखाने में लेखांकन वर्ष के दौरान किसी भी समय संपत्ति का उपयोग किया गया है तो ऐसी स्थिति में कारखाने के मालिक मूल्यह्रास का दावा करने के हकदार हैं। आयकर अधिनियम 1961 के धारा 38 के अनुसार, आयकर अधिकारी को मूल्यह्रास का आनुपातिक (प्रोपोर्शनेट) भाग निर्धारित करने का अधिकार है।
  • बेची गई संपत्तियों पर कटौती का दावा नहीं कर सकते: एक निर्धारिती मूल्यह्रास योग्य संपत्तियों पर कटौती का दावा नहीं कर सकता है। यदि कोई संपत्ति उसी वर्ष बेची जाती है, नष्ट की जाती है या ध्वस्त की जाती है जब उसे अर्जित किया गया था तो निर्धारिती कटौती का दावा नहीं कर सकता है।
  • यदि किसी संपत्ति का कोई सह-मालिक है तो सह-मालिक भी संपत्ति पर मूल्यह्रास का दावा कर सकता है। 

लिखित मूल्य विधि (ब्लॉकवार)

हर साल संपत्ति का बुक वैल्यू घटता जाता है और संपत्ति के मूल्यह्रास की गणना संपत्ति के बुक वैल्यू पर की जाती है। संपत्ति के मूल्यह्रास की गणना करने के लिए लिखित मूल्य (डब्ल्यूडीवी) विधि सबसे अच्छा तरीका है क्योंकि मूल्यह्रास राशि समय के साथ घटती रहती है। आयकर अधिनियम 1961 की धारा 32(1) कहता है कि मूल्यह्रास की गणना संपत्ति के डब्लूडीवी पर निर्धारित प्रतिशत पर की जानी चाहिए, जिसकी गणना संपत्ति की वास्तविक लागत के संदर्भ में की जाती है। जब एक निर्धारिती पिछले वर्ष में संपत्ति प्राप्त कर रहा है तो वास्तविक लागत डब्लूडीवी बन जाती है। जबकि पिछले वर्ष में अर्जित संपत्ति डब्लूडीवी अधिनियम के तहत अनुमत मूल्यह्रास को घटाकर वास्तविक लागत के बराबर होगी। 

इसे निम्नलिखित उदाहरण से आसानी से समझा जा सकता है:

1.04.2017 को मूल्यह्रास योग्य संपत्ति जिस पर मूल्यह्रास 25% की समान दर पर उपलब्ध है।

संपत्ति A 3,00,000
संपत्ति B 5,00,000
संपत्ति C 7,00,000
कुल योग  15,00,000
कम: 15,00,000 का 25% मूल्यह्रास (3,75,000)
1. संपत्ति के एक खंड का मूल्य 1.4.2018 को लिखा गया।

योग : 2018-19 के दौरान खरीदी गई संपत्ति की लागत

11,25,000

6,00,000

ii). शेष

वर्ष 2018-19 के दौरान संपत्ति B बेची गई

17,25,000

(6,75,000)

iii) शेष 

कटौती : 2018-19 के लिए रु 10,50,000 का @ 25% मूल्यह्रास।     

10,50,000

(2,62,5000)

1.04.2019 को सभी संपत्तियों का मूल्य लिखा गया 7,87,500

आयकर अधिनियम के तहत अतिरिक्त मूल्यह्रास

आयकर अधिनियम केवल लिखित मूल्य पद्धति की अनुमति देता है। अतिरिक्त मूल्यह्रास पद्धति के अनुसार, आप केवल उन संपत्तियों पर कटौती प्राप्त कर सकते हैं जिनका उपयोग व्यवसाय या पेशे में किया गया है। हालांकि, एक निर्धारिती को कटौती केवल तभी मिल सकती है जब संपत्ति का उपयोग उस वर्ष में किया गया हो जिसमें इसे खरीदा गया था। लेकिन आयकर अधिनियम, 1961 में नए संशोधन के अनुसार, धारा 32(1)(iia) का कहना है कि एक निर्धारिती उन संयंत्रों और यंत्रों पर 20% का मूल्यह्रास प्राप्त कर सकता है जो किसी वस्तु के निर्माण या उत्पादन के व्यवसाय में शामिल रहे हैं। अतिरिक्त मूल्यह्रास के तहत कटौती का लाभ उठाने के लिए खरीद और स्थापना की तारीख 31 मार्च 2005 के बाद होनी चाहिए। एक निर्धारिती विमान और जहाजों पर अतिरिक्त मूल्यह्रास का लाभ नहीं उठा सकता है। इन्हें अतिरिक्त मूल्यह्रास से बाहर रखा गया है। 

आकलन वर्ष 2013-14 से एक नया प्रावधान जोड़ा गया है. इसके अलावा, 2017-18 से, आयकर अधिनियम, 1961 में एक और नया प्रावधान जोड़ा गया है जो कहता है कि जो निर्धारिती सत्ता के पेशे से जुड़े हैं, वे भी अतिरिक्त मूल्यह्रास का लाभ उठा सकते हैं। यदि किसी संपत्ति का उपयोग 180 दिनों से कम समय के लिए किया गया है तो अतिरिक्त मूल्यह्रास की दर के 50% पर अतिरिक्त मूल्यह्रास की अनुमति है।

पिछड़े क्षेत्र में मूल्यह्रास

1 अप्रैल 2016 से, आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 32(1)(iia) पिछड़े क्षेत्रों में मूल्यह्रास की संभावना की अनुमति देता है। यदि कोई निर्धारिती  किसी पिछड़े राज्य (बिहार, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल) में विनिर्माण या उत्पादन का व्यवसाय स्थापित करता है, तो उन निर्धारिती  के लिए उपलब्ध अतिरिक्त मूल्यह्रास 35% है, न कि 20%। शिफ्ट और विमान को अतिरिक्त मूल्यह्रास से बाहर रखा गया है। हालांकि, एक निर्धारिती मशीनरी खरीद और स्थापित कर सकता है।    

अतिरिक्त मूल्यह्रास के लिए कौन पात्र नहीं है?

आयकर अधिनियम, 1961 के धारा 32(1)(iia) के अनुसार, यदि कोई निर्धारिती निम्नलिखित शर्तों को पूरा करता है, तो वे अतिरिक्त मूल्यह्रास के तहत कटौती का लाभ उठाने के लिए पात्र नहीं हैं:

  • भारत में स्थापित होने से पहले, भारत के बाहर उपयोग किए गए संयंत्रों और यंत्रों पर अतिरिक्त मूल्यह्रास का दावा नहीं किया जा सकता है। 
  • आप उन संयंत्रों और यंत्रों पर कटौती का दावा नहीं कर सकते जो कार्यालय परिसर या आवासीय आवास में स्थापित किए गए हैं। 
  • एक निर्धारिती फर्नीचर, भवन, जहाज, विमान, कार्यालय उपकरण, सड़क परिवहन में प्रयुक्त वाहन, अतिथि गृह (गेस्ट हाउस) की प्रकृति सहित आवासीय आवास जैसी संपत्तियों पर अतिरिक्त मूल्यह्रास के तहत कटौती का दावा नहीं कर सकता है।

बिजली उत्पादन में अतिरिक्त मूल्यह्रास

अतिरिक्त मूल्यह्रास पर कटौती केवल उस निर्धारिती के लिए स्वीकार्य है जो उत्पादन में शामिल है। बिजली उत्पादन करने वाले निर्धारिती द्वारा संघर्ष का मामला उठाया गया है। हालांकि, निर्धारिती को अतिरिक्त मूल्यह्रास की अनुमति देने के लिए संसद द्वारा एक निश्चित संशोधन किया गया है।

निर्धारिती, एक संयुक्त उद्यम कंपनी, जो जल विद्युत संयंत्र (थर्मल पावर प्लांट) में शामिल थी, ने आयकर अधिनियम की धारा 32(1)(iia) के तहत अतिरिक्त मूल्यह्रास पर कटौती का लाभ उठाने के लिए एक दावा उठाया था। हालांकि, एक मूल्यांकन अधिकारी ने इस आधार पर दावे को खारिज कर दिया कि इस प्रकार का लाभ केवल उस निर्धारिती को दिया जाएगा जो किसी वस्तु के उत्पादन में शामिल है और इसमें बिजली का उत्पादन शामिल नहीं है। इसके बाद, आयकर विभाग ने निर्धारिती को आयकर अधिनियम 1962 की धारा 154 के तहत नोटिस जारी किया, निर्धारिती ने आयकर अधिकारी को एक स्पष्टीकरण दिया जिसे निर्धारण अधिकारी द्वारा स्वीकार नहीं किया गया।

2013 में, आयकर अधिनियम की धारा 32(1)(iia) में संशोधन किया गया था और संशोधन के बाद आयकर अधिनियम 1961 ने एक प्रावधान बनाया जिसमें कहा गया है कि बिजली उत्पन्न करने और वितरित करने वाले व्यवसाय में शामिल इकाई को अतिरिक्त मूल्यह्रास दिया जा सकता है। आंध्र प्रदेश राज्य बनाम एनटीपीसी  के मामले में, सर्वोच्च न्यायालय ने माना कि बिजली का संचरण, हस्तांतरण और वितरण किया जा सकता है। इसलिए इस तर्क पर, आयकर अधिकारी एक निर्धारिती को बिजली उत्पादन के लिए अतिरिक्त मूल्यह्रास का दावा करने से इनकार नहीं कर सकता है। सर्वोच्च न्यायालय ने निर्धारिती  के पक्ष में फैसला सुनाया और माना कि बिजली उत्पादन करने वाला निर्धारिती आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 32 (1) (iia) के तहत अतिरिक्त मूल्यह्रास की कटौती का दावा कर सकता है।

निष्कर्ष  

आयकर अधिनियम, 1961 के धारा 32 मूल्यह्रास के कारण अनिवार्य कटौती की अनुमति देता है। हालांकि, आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 32 के तहत कटौती का दावा करने के लिए एक निर्धारिती को कुछ शर्तों को पूरा करना होगा। लिखित विधि आयकर अधिनियम के तहत मूल्यह्रास की गणना करने के सर्वोत्तम तरीकों में से एक है। आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 32(1)(iia) के अनुसार, एक निर्धारिती अतिरिक्त मूल्यह्रास का दावा कर सकता है। मूल्यह्रास निर्धारिती को कई तरह से मदद करता है, कभी-कभी यह वित्तीय प्रबंधन में मदद करता है और कभी-कभी यह कर बचत विकल्प के रूप में कार्य करता है।

संदर्भ

  1. Income Tax Act, 1961.
  2. Tax law book by Taxman.
  3. https://cleartax.in/s/depreciation-income-tax-act

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