होमAn overview on exchanges under the Transfer of Property Act 1882संपत्ति हस्तांतरण अधिनियम 1882 के तहत विनिमय  पर एक अवलोकन

संपत्ति हस्तांतरण अधिनियम 1882 के तहत विनिमय  पर एक अवलोकन

संपत्ति हस्तांतरण अधिनियम 1882 के तहत विनिमय  पर एक अवलोकन

यह लेख Sonu द्वारा रियल एस्टेट कानूनों में सर्टिफिकेट कोर्स कर रहे  छात्र द्वारा लिखा गया है और Oishika Banerji (Team Lawsikho) द्वारा संपादित किया गया है। यह लेख संपत्ति हस्तांतरण अधिनियम, 1882 के तहत किए गए विनिमय (एक्सचेंज) के प्रावधानों  के बारे में बात करता है, इस लेख का अनुवाद Hardik Bathla ने किया है।

परिचय

विनिमय, सामाजिक जुड़ाव और हस्तांतरण समाज की प्रकृति द्वारा अनिवार्य हैं। कई परिस्थितियां और कारण हैं कि संपत्ति, चाहे चल या अचल, एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को हस्तांतरित की जाती है। हस्तांतरण एक उपहार, एक विरासत, या एक पूर्ण मूल्य वाली खरीद के रूप में किया जा सकता है सकता है। जबकि माल विक्रय अधिनियम, 1930 तब लागू होता है जब दो जीवित लोगों के बीच चल संपत्ति हस्तांतरित की जाती है, संपत्ति हस्तांतरण अधिनियम, 1882 तब लागू होता है जब एक अचल संपत्ति को एक जीवित व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में स्थानांतरित किया जाता है। यह ध्यान रखना अनिवार्य है कि एक विनिमय तब होता है जब एक संपत्ति दूसरे के बदले में स्थानांतरित किया जाता है। इसे 1882 के अधिनियम की धारा 118 के तहत शासित किया गया है। यह लेख अपने पाठकों के लिए विनिमय की अवधारणा की व्याख्या के रूप में कार्य करता है।

विनिमय की अनिवार्यताएं

यह ध्यान रखनाअनिवार्य है कि माल के आदान-प्रदान का अभ्यास प्राचीन काल से है और अतीत में ऐसे कई उदाहरण हैं जहां लोगों के वस्तु विनिमय प्रणाली के माध्यम से अपने माल के आदान-प्रदान के अभ्यास में होने के सबूत हैं। विनिमय को संपत्ति हस्तांतरण अधिनियम, 1882 के अध्याय VI के अंतर्गत शामिल किया गया है, जिसमें केवल 4 धाराएं शामिल हैं। यह सदियों पुरानी अवधारणा संपत्ति कानून में इसकी उपस्थिति के साथ महत्व में रही है क्योंकि इसमें स्वामित्व की अवधारणा की भागीदारी है। अध्याय VI में संपत्ति हस्तांतरण अधिनियम 1882 की धारा 118 से 121 शामिल है। विनिमय की आवश्यक वस्तुएं यहां प्रदान की गई हैं: 

  1. दो अलग-अलग वस्तुओं और दो अलग-अलग लोगों के बीच एक समझौता होना चाहिए।
  2. संपत्ति के लिए चल और अचल दोनों, दोनों चल और दोनों अचल, या एक चल और एक अचल होना संभव है।
  3. इस तरह के लेनदेन में, प्रत्येक पक्ष खरीदार और विक्रेता दोनों है।
  4. जिन चीजों को स्थानांतरित किया गया है, वे शामिल पक्षों से संबंधित होनी चाहिए।
  5. एक लेनदेन में जब स्वामित्व का कोई हस्तांतरण नहीं होता है, तो विनिमय नहीं हो सकता है। 
  6. उदाहरण के लिए, एक पारिवारिक समझौता या तलाक, उदाहरण के लिए, एक विनिमय के रूप में नहीं देखा जाएगा।संपत्ति प्रतिफल है, पैसा नहीं, इसलिए विनिमय में कोई कीमत नहीं दी जाती है।
  7. अचल संपत्ति का रिकॉर्ड किया गया आदान-प्रदान कम से कम 100 रुपये में होना चाहिए।

विनिमय में पक्षों के अधिकार और दायित्व

व्यापार के लिए प्रत्येक पक्ष को समान अधिकार दिए जाते हैं। दूसरे को स्वामित्व हस्तांतरित करने वाले व्यक्ति को विक्रेता की स्थिति में माना जाता है और संपत्ति बेचते समय विक्रेता के पास सभी अधिकार होते हैं। संपत्ति प्राप्त करने वाले व्यक्ति को खरीदार के रूप में माना जाता है, और इस तरह, उन सभी अधिकारों का आनंद लेता है जो एक खरीदार का हकदार है।जब प्राप्त करने वाले छोर पर, एक व्यक्ति के पास खरीदार के समान अधिकार होते हैं, जिसमें अच्छी स्थिति में सामान प्राप्त करने का अधिकार और यदि ऐसा नहीं है तो नुकसान के लिए मुकदमा करने का अधिकार शामिल है। उसे स्थानांतरित होने के बाद उस संपत्ति पर सभी अधिकार रखने का अधिकार है।

क्या पैसे का आदान-प्रदान संभव है?

पैसा विनिमय की वस्तु नहीं हो सकता, क्योंकि यह एक घोषित नियम है। हालांकि, संपत्ति हस्तांतरण अधिनियम, 1882 की धारा 121 में कहा गया है कि यदि पक्षों के बीच धन हस्तांतरित किया जाता है, तो प्रत्येक पक्षों को उस धन की वैधता के लिए गारंटी देनी चाहिए जो दूसरे पक्ष को सौंप दिया गया है। यदि पैसे का कारोबार किया जाता है, तो इसे वास्तविक दिखाया जाना चाहिए। पैसे का आदान-प्रदान कई अलग-अलग अवसरों पर हो सकता है। उदाहरण के लिए, यूके में एक आगंतुक (विजिटर)  के पास उस देश का पैसा होना चाहिए। इसलिए, जब वह पाउंड के लिए अपने रुपये स्वैप करता है, तो वह वित्तीय लेनदेन कर रहा होता है।

विनिमय मदों का मूल्यांकन

विनिमय की परिभाषा में कहीं भी व्यापार में आदान-प्रदान की गई वस्तुओं के मूल्य का कोई उल्लेख नहीं है। किसी चीज़ से जुड़े किसी भी मूल्य को माल का व्यापार करने वाले दलों द्वारा विपरीत पक्षों को स्थानांतरित किया जा सकता है। तथ्य यह है कि दो वस्तुओं का समान मूल्य नहीं है। इस प्रकार, हस्तांतरण स्वैच्छिक होना चाहिए और माल का व्यापार करने वाले लोगों द्वारा पारस्परिक रूप से सहमत होना चाहिए।

पक्षों का अधिकार, विनिमय में प्राप्त वस्तु से वंचित

1882 के अधिनियम की धारा 119 के अनुसार, जब तक विनिमय की शर्तों से विपरीत इरादा प्रकट नहीं होता है, यदि किसी विनिमय के लिए कोई पक्ष या ऐसे  पक्ष के माध्यम से या उसके तहत दावा करने वाला कोई व्यक्ति वस्तु या वस्तु के किसी भी हिस्से से वंचित है। बदले में दूसरे पक्ष के शीर्षक में किसी दोष के कारण, ऐसी अन्य पक्ष उसके या उसके माध्यम से या उसके तहत दावा करने वाले किसी भी व्यक्ति के प्रति उत्तरदायी है, या नुकसान के लिए वंचित व्यक्ति के विकल्प पर। या, इस तरह से वंचित व्यक्ति के विवेक पर, स्थानांतरित वस्तु की बहाली के लिए, यदि यह अभी भी दूसरे पक्ष, उसके कानूनी प्रतिनिधि, या उसके द्वारा विनिमय के महत्वपूर्ण उद्देश्य

संपत्ति के हस्तांतरण के लिए कानून की नजर में वैध और कानूनी होने के लिए मिलने वाले तीन सबसे महत्वपूर्ण लक्ष्यों को हस्तांतरण की एक विधि के रूप में विनिमय के विचार (आइडियाज ऑफ़ विनिमय) में शामिल किया गया है। तीन उद्देश्य हैं:

  • आपसी विनिमय;
  • विनिमय का उद्देश्य वैध होना चाहिए;
  • मौखिक विनिमय की स्वीकार्यता।

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आपसी आदान-प्रदान

यह ज्यादातर दिखाता है कि दोनों पक्ष  समझौते में हैं और एक दूसरे के लिए माल स्थानांतरित या स्वैप करने के लिए तैयार हैं। उदाहरण के लिए, यदि A अपनी संपत्ति B को हस्तांतरित करता है, तो B को अपनी संपत्ति को विनिमय में A में स्थानांतरित करना होगा। यह महत्वपूर्ण है कि दोनों पक्ष हस्तांतरण में योगदान दें।

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विनिमय का उद्देश्य वैध होना चाहिए

इस तरह का कोई भी हस्तांतरण स्वाभाविक रूप से अनुबंध कानून के दायरे में आता है, और इस तरह के किसी भी हस्तांतरण को अनुबंध की शर्तों का पालन करना चाहिए। नतीजतन, वस्तुओं या संपत्ति के आदान-प्रदान के लिए पक्षों के अभिप्रेत (इंटेंडेड) में कुछ भी अवैध शामिल नहीं होना चाहिए क्योंकि ऐसा करने से कानून का उल्लंघन होगा और पूरे लेनदेन को अमान्य कर दिया जाएगा। उदाहरण के लिए, यह दावा किया जा सकता है कि एक विनिमय कानून की नजर में अवैध और शून्य है यदि अनुबंध के पक्षों के बीच आपराधिक मामले को निपटाने के लिए विनिमय के विलेख में रुचि रखते हैं।

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मौखिक विनिमय की स्वीकार्यता

संपत्ति हस्तांतरण अधिनियम, 1882 के लिए पंजीकरण की आवश्यकता होती है, और यह 1929 में स्पष्ट किया गया था जब इसे प्रतिबिंबित करने के लिए, पंजीकरण अधिनियम की धारा 49 में संशोधन किया गया था। इस तथ्य के प्रकाश में कि एक अपंजीकृत विनिमय प्रमाण के रूप में स्वीकार्य नहीं है, यह स्पष्ट हो गया कि विनिमय का एक विलेख जो विशुद्ध रूप से मौखिक समझौते पर आधारित है, वैध नहीं हो सकता है। यदि वे पंजीकृत नहीं हैं और ऐसी किसी भी अचल संपत्ति पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है, तो वे इसमें शामिल किसी भी अचल संपत्ति को प्रभावित करने वाले किसी भी लेनदेन के सबूत के रूप में स्वीकार्य नहीं हैं। 100 रुपये या उससे अधिक मूल्य की चल संपत्ति से जुड़े किसी भी विनिमय लेनदेन को पंजीकृत साधन का उपयोग करके पूरा करना होगा।

विनिमय में पक्षों के अधिकार और देनदारियां

पक्षों के हितों को सुरक्षित करने के लिए और उनके शोषण को रोकने के लिए, हस्तांतरणकर्ता और अंतरिती (ट्रंसफरेर एंड ट्रांस्फ़ेरी ) को भी कुछ अधिकार दिए जाते हैं जब एक संपत्ति को विनिमय में स्थानांतरित किया जाता है। पक्षों के अधिकारों और दायित्वों पर धारा 119 और 120 में चर्चा की गई है। धारा 119 में आकस्मिकता का प्रावधान है कि विनिमय के पक्षों में से एक दूसरे पक्ष के शीर्षक में दोष के परिणामस्वरूप उसके द्वारा प्राप्त संपत्ति खो देता है, जो निम्नलिखित के लिए हकदार है:

  1. इस तरह के दोष के कारण होने वाले नुकसान के लिए; 
  2. नहीं तो इस तरह से वंचित व्यक्ति के विवेक पर स्थानांतरित की गई चीज की वापसी के लिए, अगर चीज अभी भी ऐसी किसी अन्य पक्ष (या उसके कानूनी प्रतिनिधि) के कब्जे में है।

इस वाचा (कोवेनेंट) को पक्षों पर लागू नहीं माना जा सकता है यदि वे स्पष्ट रूप से विपरीत के लिए सहमत हुए हैं। इस अनुच्छेद के तहत, जिस व्यक्ति को दूसरे पक्ष के दोषपूर्ण शीर्षक के परिणामस्वरूप नुकसान हुआ है, उसके पास सहारा के लिए दो विकल्प हैं:

  1. वह अपने नुकसान के लिए मुआवजे की मांग कर सकता है;
  2. वह उस वस्तु को वापस ले सकता है जिसे उसने स्थानांतरित किया है।

दूसरा उपाय, हालांकि, केवल निम्नलिखित तीन स्थितियों में उपलब्ध है:

  1. जहां संपत्ति अभी भी दूसरे पक्ष के कब्जे में है, 
  2. या अपने कानूनी एजेंट की देखभाल में; 
  3. बिना भुगतान के उससे किसी अन्य व्यक्ति को स्थानांतरित कर दिया गया;

जट्टू राम बनाम हकामा सिंह (1994) मामले में, सर्वोच्च न्यायालय ने फैसला सुनाया कि आधिकारिक रिकॉर्ड में एक पटवारी द्वारा की गई प्रविष्टियां एक शीर्षक नहीं बनाती हैं, और इसके परिणामस्वरूप, विरोधी पक्ष को उस हद तक संपत्ति (भूमि) वापस करने की आवश्यकता होती है, जब शीर्षक के साथ कोई समस्या होती है। पटवारी द्वारा की गई मिथ्या प्रविष्टियों के फलस्वरूप एक पक्ष द्वारा अदला-बदली हेतु भूमि प्राप्त की गई तथा पक्षकार को अनुबंध के अनुसार भूमि के कुछ भाग से वंचित कर दिया गया।

समाप्ति

सामाजिक संपर्क, विनिमय और हस्तांतरण किसी भी सभ्यता के लिए महत्वपूर्ण हैं। ऐसी कई परिस्थितियां, शर्तें और उद्देश्य हैं जिनमें चल या अचल संपत्ति को एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में स्थानांतरित किया जाता है। विनिमय का विचार और संपत्ति हस्तांतरण अधिनियम, 1882 में इसे शामिल करना पक्षों के बीच संपत्ति के हस्तांतरण में महत्वपूर्ण रहा है। विनिमय का विचार सभ्यता में समय की शुरुआत से, वस्तु विनिमय प्रणाली के माध्यम से, इसके मौलिक तत्वों में कुछ अजीब संशोधनों के साथ कायम रहा है। संपत्ति हस्तांतरण अधिनियम, 1882 के कानूनी ढांचे को पूरी तरह से उत्परिवर्तित (अपडेटेड) किया गया है और उन संशोधनों के साथ वाकिफ किया गया है जो वर्तमान कानूनी प्रणाली के अनुरूप हैं, ताकि विनिमय में किसी भी पक्ष द्वारा धोखाधड़ी के  कार्यो  के दायरे को कम किया जा सके। पहले से मौजूद नियम, हालांकि संशोधित किए गए हैं, अभी भी मजबूत करने की आवश्यकता है, ताकि संपत्ति के आदान-प्रदान में शामिल संघर्षों की संख्या को कम किया जा सके। स्वामित्व के हस्तांतरण (ट्रांसफर) की प्रभावशीलता को बढ़ाने के लिए, समय के अनुरूप sकानूनों को प्रभावी और संशोधित करके ऐसी खामियों को ढूंढना और बंद करना होगा, यह हमारा दायित्व है और लोगों के हितों की रक्षा करना सरकार का कर्तव्य है। और संपत्ति के हस्तांतरण के इस पारंपरिक तरीके को आम जनता के लिए अधिक सुलभ बनाना।

संदर्भ

 

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