होमDifference between discovery and invention according to Patent Actपेटेंट अधिनियम के अनुसार खोज और आविष्कार के बीच अंतर

पेटेंट अधिनियम के अनुसार खोज और आविष्कार के बीच अंतर

पेटेंट अधिनियम के अनुसार खोज और आविष्कार के बीच अंतर

यह लेख लॉसिखो से लॉ फर्म प्रैक्टिस: रिसर्च, ड्राफ्टिंग, ब्रीफिंग और क्लाइंट मैनेजमेंट में डिप्लोमा कर रही Simranjeet Kaur द्वारा लिखा गया है। इसका संपादन Tanmaya Sharma (एसोसिएट, लॉसिखो) और Smriti Katiyar (एसोसिएट, लॉसिखो) ने किया है। यह लेख पेटेंट अधिनियम के अनुसार खोज और आविष्कार के बीच अंतर के बारे में बात करता है। इस लेख का अनुवाद Shubham Choube द्वारा किया गया है।

परिचय

खोज और आविष्कार दो ऐसे शब्द हैं जिन्हें अक्सर गलत समझा जाता है क्योंकि सुनने में ऐसा लगता है कि ये एक ही चीज़ हैं लेकिन वास्तव में, इन दोनों का अर्थ बिल्कुल अलग है। दोनों शब्दों के बीच अंतर को समझने के लिए, दोनों शब्दों के अलग-अलग अर्थों को समझना महत्वपूर्ण है। खोज और आविष्कार इन दोनों शब्दों का अर्थ किसी नई चीज़ को ध्यान में लाना या किसी नई चीज़ पर प्रकाश डालना आदि है। हालाँकि, जमीनी स्तर पर इन शब्दों के अलग-अलग अर्थ हैं।

खोज क्या है?

किसी ऐसी चीज़ की खोज करने का कार्य जो पहले से ही प्रकृति या पर्यावरण में मौजूद है लेकिन जिसे पहले कभी पहचाना नहीं गया था उसे ‘खोज’ कहा जाता है। किसी नई चीज़ की पहचान जो पहले से मौजूद है उसे खोज कहा जाता है। कोई ऐसी चीज़ जो प्रकृति या पर्यावरण में तो थी लेकिन कभी इंसान की नज़रों के सामने नहीं आई और अब पहचानी जा चुकी है, इसलिए उसे ‘नया’ माना जाएगा।

उदाहरण के लिए, जीवाश्म (फॉसिल)। वैज्ञानिकों ने ऐसे जीवाश्मों की खोज की है जो हजारों वर्षों से मौजूद हैं लेकिन वास्तव में मनुष्यों द्वारा पहले कभी नहीं पहचाने गए हैं। एक अन्य उदाहरण पौधों या जानवरों की नई प्रजातियाँ होंगी। इसलिए जो चीजें प्रकृति में काफी समय से मौजूद थीं लेकिन हम इंसानों द्वारा नहीं पहचानी गई थीं, वे खोज के दायरे में आएंगी।

एक आविष्कार क्या है?

किसी की बुद्धि या ज्ञान, कौशल आदि का उपयोग करके किसी चीज़ का निर्माण या डिज़ाइन करना या ऐसी चीज़ बनाने या डिज़ाइन करने की प्रक्रिया जो पहले कभी अस्तित्व में नहीं थी, ‘आविष्कार’ कहलाती है। अपने ज्ञान, विचारों या प्रयोगों की सहायता से किसी नई चीज़ का निर्माण या डिज़ाइन करना आविष्कार के अंतर्गत आता है।

उदाहरण के लिए, टेलीविजन या सेल फोन का निर्माण पहले कभी नहीं हुआ था। इन्हें वैज्ञानिकों ने अपने विचारों और प्रयोगों का उपयोग करके बनाया था। हालाँकि, ध्यान देने वाली बात यह है कि जिन हिस्सों का इस्तेमाल इस तरह के आविष्कार को बनाने में किया गया था वे पहले से ही मौजूद थे लेकिन वैज्ञानिकों ने ऐसे हिस्सों का इस्तेमाल कुछ नया बनाने में किया और उसे आविष्कार कहा जाता है।

खोज और आविष्कार

किसी खोज और आविष्कार के बीच प्रमुख अंतर निम्नलिखित हैं:

  1. पूर्व अस्तित्व: खोज ऐसी चीज हैं जो पहले से ही अस्तित्व में थीं लेकिन जब तक इसे मान्यता नहीं दी गई तब तक हमें इसके बारे में ज्ञान नहीं था, जबकि दूसरी ओर, आविष्कार वे चीजें आदि हैं जो पहले कभी अस्तित्व में नहीं थीं, लेकिन केवल वे हिस्से या चीजें थीं जिनका उपयोग आविष्कार निर्माण में किया गया था।
  2. घटना: खोजों की घटना स्वाभाविक है; हालाँकि, आविष्कार मानव निर्मित चीजों या वस्तुओं की घटनाएँ हैं।
  3. इसमें शामिल है: खोजों में अन्वेषण (एक्सप्लोरेशन) शामिल है जबकि आविष्कारों में प्रयोग शामिल है।
  4. मौलिकता (ओरिजिनेलिटी): यद्यपि खोज और आविष्कार दोनों को ‘नया’ माना जाता है, क्योंकि खोज किसी ऐसी चीज़ के निष्कर्षों से संबंधित है जो प्रकृति में पहले से मौजूद है, इसलिए खोज मौलिक नहीं है। हालाँकि, आविष्कार पहले से मौजूद चीजों का उपयोग करके कुछ नया बनाने से संबंधित है, इसलिए, एक आविष्कार मौलिक है।
  5. पेटेंट योग्यता: एक खोज पेटेंट योग्य नहीं है, जबकि, एक आविष्कार पेटेंट योग्य है।

खोज और आविष्कार के बीच संबंध

आइए दूरबीन और चंद्रमा के पहाड़ों का उदाहरण लें। दूरबीन का आविष्कार एक चश्मा निर्माता डचमैन ने किया था। दूरबीन के आविष्कार के कारण ही, गैलीलियो गैलीली चंद्रमा के पहाड़ों की खोज करने के लिए आकाश में काफी दूर तक देखने में सक्षम थे। गैलीलियो ने चंद्रमा के पहाड़ों का आविष्कार नहीं किया था बल्कि उन्होंने इन्हें आविष्कार यानी दूरबीन की मदद से खोजा था।

ठीक उसी तरह, आविष्कारों से खोज हो सकती है और इसी तरह, खोजों से भी आविष्कार हो सकते हैं। उदाहरण के लिए, बेंजामिन फ्रैंकलिन ने बिजली के विद्युत प्रभावों की खोज की जिसके बाद उन्हें बिजली की छड़ का आविष्कार करना पड़ा जो अभी भी उपयोग में है और तूफान के दौरान इमारतों को अधिक सुरक्षित बनाने में मदद करती है। इसलिए, आविष्कार और खोज, कभी-कभी, एक-दूसरे से संबंधित होते हैं।

पेटेंट क्या है?

पेटेंट क्या है इसके बारे में विस्तार से जानने से पहले, आइए पहले कुछ और चर्चा करें। आपके पास निर्माण की प्रतिभा और धन संचय करने की इच्छा है। दुर्भाग्य से, उस विचार को कभी साकार नहीं किया जा सका क्योंकि किसी और ने आपका विचार चुरा लिया था क्योंकि आप पेटेंट नामक एक छोटी सी चीज़ (ऐसा नहीं) से अनजान थे। अपने विचार को पेटेंट के लिए पंजीकृत करके, इस सब को रोका जा सकता है।

पेटेंट एक कानूनी दस्तावेज है जिसे सरकार निर्माता को जारी करती है, जिससे उसे विचार के प्रकाशन के बाद पूर्व निर्धारित समय के लिए आविष्कार को बेचने, निर्माण, उपयोग और आयात करने का विशेष अधिकार मिलता है। अपनी ओर से कौन अपने उत्पाद बेच सकता है, इसे सीमित करके, नवप्रवर्तकों की सुरक्षा के लिए कानून द्वारा पेटेंट की आवश्यकता होती है। “पेटेंट” वाक्यांश के स्रोत पुरानी फ़्रेंच, पुरानी लैटिन और पुरानी अंग्रेज़ी हैं। लैटिन “पेटेंटेम” और फ्रेंच “पेटेंटे” से, जो दोनों खुले पत्र को इंगित करते हैं, यह पहली बार 13 वीं शताब्दी के अंत में सामने आया था। 1580 के दशक में, इस वाक्यांश ने अपना वर्तमान अर्थ प्राप्त कर लिया जब इसे एक विशिष्ट वस्तु बनाने और बेचने के लिए सरकार द्वारा जारी परमिट के रूप में समझाया गया।

किसी उत्पाद को विकसित करने, बढ़ावा देने और बेचने के लिए व्यवसाय में पेटेंट का उपयोग किया जाता है। लोग जो उत्पाद खरीदते हैं उनमें से कई के लिए पेटेंट का उपयोग किया जाता है। एक बार जब पेटेंट आवेदन सरकार द्वारा स्वीकार कर लिया जाता है, तो यह आम तौर पर आवेदन की तारीख से 20 साल तक चलता है। पेटेंट वह दस्तावेज़ है जो किसी व्यक्ति या व्यवसाय को उत्पाद बेचने का एकमात्र अधिकार देता है। पेटेंट संसाधित और अधिकृत (ऑथराइज़्ड) होने के बाद पेटेंट आवेदक या विक्रेता अपने सामान के लिए रॉयल्टी एकत्र करना शुरू कर सकते हैं। रॉयल्टी किसी उत्पाद के निर्माता को उसके उपयोग के अधिकार के बदले में किया गया भुगतान है; यह उनके श्रम की प्रतिपूर्ति (रैमबर्समेंट) के रूप में कार्य करता है। यह एक टेलीविजन वाणिज्यिक (कमर्शियल) निर्माता के रूप में हो सकता है जो किसी गीतकार को किसी विज्ञापन में उनके संगीत के उपयोग के लिए रॉयल्टी का भुगतान करता है। कम से कम जब तक उत्पाद बाजार में जारी नहीं किया जाता है, तब तक पेटेंट और रॉयल्टी को आम तौर पर फर्मों द्वारा ठोस समझौतों और व्यापार रहस्यों के माध्यम से गोपनीय रूप से बनाए रखा जाता है। भले ही कोई पेटेंट आवेदन अनंतिम या पूर्ण विनिर्देश के साथ दायर किया गया हो, सभी भारतीय पेटेंट में दाखिल करने की तारीख से शुरू होने वाली 20 साल की अवधि होती है। हालाँकि, 20 साल की अवधि पेटेंट सहयोग संधि (पीसीटी) के तहत प्रस्तुत आवेदनों के लिए अंतर्राष्ट्रीय फाइलिंग की तारीख से शुरू होती है।

पेटेंट अधिनियम

पेटेंट अधिनियम, 1970 की धारा 2(j) के तहत एक आविष्कार को “एक नया उत्पाद या प्रक्रिया जिसमें एक आविष्कारशील कदम शामिल है और औद्योगिक अनुप्रयोग में सक्षम है” के रूप में परिभाषित किया गया है। यहां आविष्कारी कदम का मतलब है कि आविष्कार में कुछ प्रकार की तकनीकी प्रगति शामिल है जो पहले नहीं थी। औद्योगिक अनुप्रयोग का अर्थ है कि आविष्कार में कुछ अनुप्रयोग होना चाहिए जिसका उपयोग उद्योग में किया जा सके।

अधिनियम की धारा 3(d) उन आविष्कारों का प्रावधान करती है जो अधिनियम के तहत पेटेंट योग्य नहीं हैं। अधिनियम में यह भी विशेष रूप से कहा गया है कि खोजें अधिनियम के तहत पेटेंट योग्य नहीं हैं। अधिनियम की धारा 3(c) और(d) में कहा गया है कि किसी नए पदार्थ या वैज्ञानिक सिद्धांत आदि की खोज मात्र पेटेंट योग्य नहीं है। इसलिए, पेटेंट अधिनियम के अनुसार, एक आविष्कार जो या तो किसी उत्पाद या प्रक्रिया से संबंधित है जो नया है और जिसमें औद्योगिक अनुप्रयोग है, और इसमें एक आविष्कारशील चरण भी शामिल है, को अधिनियम के तहत पेटेंट कराया जा सकता है।

पेटेंट अधिनियम के तहत खोज

अधिनियम में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि खोज पेटेंट योग्य नहीं है और इसे पेटेंट संरक्षण से बाहर रखा गया है। धारा 3 (c) और (d) में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि प्रकृति में पहले से मौजूद किसी चीज़ की खोज ही अधिनियम के तहत पेटेंट योग्य नहीं है क्योंकि ऐसी खोज नई नहीं है और इसलिए इसे आविष्कार नहीं माना जाएगा। पेटेंट अधिनियम के तहत, केवल आविष्कार ही पेटेंट योग्य हैं, खोज नहीं।

अधिनियम के तहत किसी खोज के पेटेंट योग्य न होने का कारण यह है कि किसी नए रूप, पदार्थ आदि की खोज कोई नई चीज़ नहीं है। यह पहले से ही प्रकृति में मौजूद है और इसलिए इसे एक नए आविष्कार के रूप में नहीं माना जा सकता है क्योंकि इसमें कोई आविष्कारशील चरण, कौशल आदि शामिल नहीं है। इसलिए, ऐसी खोज को आविष्कार के रूप में नहीं माना जाएगा और अधिनियम के तहत पेटेंट योग्य नही होगा।

पेटेंट अधिनियम के तहत आविष्कार

पेटेंट अधिनियम, 1970 एक आविष्कार को एक नए उत्पाद या एक प्रक्रिया के रूप में परिभाषित करता है जिसमें एक आविष्कारशील चरण होता है और कुछ औद्योगिक अनुप्रयोग होता है। किसी आविष्कार को पेटेंट प्राप्त करने की योग्यता प्राप्त करने के लिए, उसे कुछ शर्तों को पूरा करना होगा जो इस प्रकार हैं:

  • यह नया होना चाहिए;
  • इसका औद्योगिक अनुप्रयोग होना चाहिए;
  • इसमें कुछ आविष्कारशील चरण शामिल होने चाहिए;
  • इसे अधिनियम की धारा 3 और 4 के दायरे में नहीं आना चाहिए।

यदि उपर्युक्त शर्तें पूरी होती हैं तो उक्त आविष्कार को अधिनियम के तहत पेटेंट कराया जा सकता है।

अधिनियम की धारा 3 और 4 उन आविष्कारों से संबंधित हैं जिनका पेटेंट नहीं कराया जा सकता है। अधिनियम के तहत निम्नलिखित चीज़े पेटेंट योग्य नहीं हैं:

  1. ऐसे आविष्कार जो तुच्छ और प्राकृतिक नियमों के विपरीत हैं;
  2. ऐसे आविष्कार जो सार्वजनिक नैतिकता के विरुद्ध हों;
  3. ऐसे आविष्कार जो प्रकृति में पहले से मौजूद किसी चीज़ की खोज मात्र हैं;
  4. प्रकृति में पहले से मौजूद किसी रूप की खोज मात्र से प्रभावकारिता में वृद्धि नहीं होती है;
  5. केवल मिश्रणों को मिलाने से गुणों का एकत्रीकरण (एग्रीगेशन) पेटेंट योग्य नहीं है;
  6. ज्ञात तरीके से काम करने वाले उपकरणों का मात्र एकत्रीकरण या दोहराव कोई आविष्कार नहीं है;
  7. बागवानी या कृषि पद्धति पेटेंट योग्य नहीं है;
  8. मनुष्यों और जानवरों में बीमारियों के इलाज के लिए औषधीय, उपचारात्मक, रोगनिरोधी, नैदानिक (डायग्नोस्टिक), चिकित्सीय पेटेंट योग्य नहीं हैं;
  9. जानवरों और पौधों के उत्पादन या प्रसार (प्रोपगेशन) के लिए आवश्यक जैविक प्रक्रियाएँ कोई आविष्कार नहीं हैं;
  10. सरल गणितीय या व्यवसाय या कंप्यूटर प्रोग्राम कोई आविष्कार नहीं हैं;
  11. सौन्दर्यपरक रचना कोई आविष्कार नहीं है;
  12. मानसिक कार्य, नियम या विधि कोई आविष्कार नहीं है;
  13. जानकारी की प्रस्तुति पेटेंट योग्य नहीं है;
  14. एकीकृत सर्किट की स्थलाकृति (टोपोग्राफी) पेटेंट योग्य नहीं है;
  15. पारंपरिक ज्ञान कोई आविष्कार नहीं है;
  16. परमाणु-ऊर्जा आविष्कार पेटेंट योग्य नही हैं।

धारा 4 परमाणु ऊर्जा से संबंधित आविष्कारों से संबंधित है जो अधिनियम के तहत पेटेंट योग्य नहीं है। इसलिए, पेटेंट अधिनियम स्पष्ट रूप से कहता है कि एक आविष्कार कुछ ऐसा है जो नया है और इसमें कुछ औद्योगिक अनुप्रयोग है और इसमें एक आविष्कारशील चरण भी शामिल होना चाहिए। हालाँकि, खोज को अधिनियम में विशेष रूप से परिभाषित नहीं किया गया है।

निष्कर्ष

यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि खोज और आविष्कार बहुत समान लग सकते हैं लेकिन उनके दो अलग-अलग अर्थ हैं। खोज आविष्कार से भिन्न है और इसके विपरीत भी। आविष्कार की परिभाषा पेटेंट अधिनियम में है। हालाँकि, अधिनियम में कहीं भी खोज शब्द को स्पष्ट रूप से परिभाषित नहीं किया गया है जो लोगों के मन में बहुत भ्रम पैदा करता है। चूँकि, दोनों शब्द इतने समान लगते हैं कि आमतौर पर इन्हें एक-दूसरे द्वारा गलत समझा जाता है।

हालाँकि, दोनों शब्द एक-दूसरे के बिल्कुल विपरीत भी नहीं हैं। खोज प्रकृति से प्राप्त होती हैं जबकि आविष्कार मानव निर्मित होते हैं और इसके लिए कुछ ज्ञान, कौशल और मानव बुद्धि की आवश्यकता होती है। वे दोनों एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं और जैसा कि ऊपर पहले बताया गया है, दोनों शब्द एक-दूसरे की ओर ले जा सकते हैं। इतिहास में देखा जा सकता है कि खोजों से कई बार आविष्कार हुए हैं और इसके विपरीत भी।

अंत में, यह कहा जा सकता है कि खोजों और आविष्कारों के कारण ही मानव जाति ने दुनिया में इतने सारे परिवर्तन देखे हैं और इन परिवर्तनों ने हमारे जीवन को कई अलग-अलग तरीकों से प्रभावित किया है। इसलिए, खोज और आविष्कार ढकी हुई या छुपी हुई चीजों, घटनाओं आदि को उजागर करने में सहायक होते हैं जो मानव जाति के लिए बहुत मददगार हो सकते हैं।

संदर्भ

  • The Patents Act, 1970

 

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