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कंपनी अधिनियम 2013 की धारा 56

कंपनी अधिनियम 2013 की धारा 56

यह लेख Moiz Akhtar द्वारा लिखा गया है। यह लेख कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 56 के तहत शेयरों के हस्तांतरण (ट्रांसफर) और शेयरों के संचरण (ट्रांसमिशन) का गहन विश्लेषण प्रदान करता है। यह लेख किसी कंपनी में शेयरों के हस्तांतरण और संचरण दोनों के पंजीकरण के लिए आवश्यक प्रक्रियाओं के सभी पहलुओं को भी शामिल करता है। इस लेख का अनुवाद Himanshi Deswal द्वारा किया गया है।

Table of Contents

परिचय

आज की 21वीं सदी में, जैसे-जैसे भारत एक बड़ी अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रहा है, इसकी व्यावसायिक गतिशीलता भी विकसित हो रही है। भारत ने 1991 के आर्थिक संकट से लेकर सबसे बड़े विदेशी मुद्रा भंडार में से एक बनाने तक एक लंबा सफर तय किया है। एलपीजी सुधारों (उदारीकरण (लिब्रलाइजेशन), निजीकरण, वैश्वीकरण) से शुरू होकर पिछले 30 वर्षों में तत्कालीन प्रधान मंत्री नरसिम्हा राव की सरकार द्वारा शुरू की गई जिसने अर्थव्यवस्था को संरक्षणवादी (प्रोटेक्शनिस्ट) से अधिक उदारवादी में बदलने के लिए निजी खिलाड़ियों और विदेशी निवेश के लिए भारतीय बाजार को खोल दिया। भारत के आर्थिक क्षेत्रों में हुए परिवर्तनों ने अर्थव्यवस्था में सभी खिलाड़ियों के लिए समान अवसर पैदा किए।

एक विकसित होती अर्थव्यवस्था उद्यमियों (एंट्रप्रनर) और निवेशकों को उनके बीच स्वस्थ संबंध विकसित करके सहयोगात्मक रूप से काम करने के लिए एक साथ लाती है। भारतीय बाजार में निवेश और अर्थव्यवस्था के दैनिक प्रवाह के लिए बीएसई (बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज) और एनएसई (नेशनल स्टॉक एक्सचेंज) जैसे व्यापार विनिमय (ट्रेडिंग एक्सचेंज) महत्वपूर्ण हैं। बीएसई एशिया का सबसे पुराना शेयर बाजार (स्टॉक एक्सचेंज) है और इसकी स्थापना 1875 में हुई थी। एनएसई की स्थापना 1992 में हुई थी और 1993 में इसे सेबी द्वारा मान्यता दी गई थी। बीएसई और एनएसई दोनों शेयर बाजार हैं जो रोजाना हजारों शेयरों की बिक्री और खरीद का काम करते हैं। इसलिए, इन दोनों एक्सचेंजों में पंजीकृत कंपनियों के कामकाज में इष्टतम स्तर की पारदर्शिता की आवश्यकता है ताकि निवेशकों को इन कंपनियों के शेयर खरीदते समय पर्याप्त मात्रा में भरोसा हो। कंपनी अधिनियम, 2013 के तहत शेयरों के दैनिक कारोबार में पारदर्शिता कंपनियों के साथ-साथ निवेशकों के लिए भी बहुत महत्वपूर्ण है।

स्टॉक और शेयर क्या हैं?

कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 2(84) एक शेयर को किसी कंपनी की शेयर पूंजी में एक हिस्से के रूप में परिभाषित करती है और इसमें स्टॉक भी शामिल है। स्टॉक व्यक्तियों द्वारा रखी गई एक प्रतिभूति है और एक निगम या कंपनी द्वारा जारी किया जाता है। स्टॉक कंपनी में व्यक्ति के स्वामित्व की सीमा को दर्शाता है। किसी व्यक्ति के पास जितने अधिक स्टॉक होंगे, उस कंपनी जहां से उसने स्टॉक खरीदे हैं, में उसके स्वामित्व का प्रतिशत उतना ही अधिक होगा। स्टॉक को एकल इकाइयों में वर्गीकृत किया जाता है और प्रत्येक इकाई को शेयर कहा जाता है क्योंकि किसी कंपनी में होल्डिंग शेयरों का हिस्सा व्यक्ति को कंपनी का आनुपातिक मालिक बनाता है और स्वामित्व व्यक्ति के पास मौजूद शेयरों की संख्या के सीधे आनुपातिक होता है।

कंपनियों द्वारा शेयर क्यों जारी किये जाते हैं?

कंपनी के व्यवसाय को आगे बढ़ाने के लिए पूंजी एकत्र करने के लिए शेयर महत्वपूर्ण हैं। रोजमर्रा की गतिविधियों और व्यवसाय को चलाने के लिए कंपनियों को पूंजी की आवश्यकता होती है। निवेशक अपनी पसंद की कंपनियों के शेयर खरीदते हैं और कंपनियां निवेशकों के पैसे का उपयोग अपनी उत्पादन गतिविधियों, विनिर्माण, कच्चा माल खरीदने, कर्ज चुकाने और कई अन्य व्यावसायिक गतिविधियों के लिए करती हैं। तदनुसार, कंपनी द्वारा अर्जित मुनाफा उसके सभी शेयरधारकों को उनके शेयरों की संख्या के अनुपात में समान रूप से वितरित किया जाता है। उदाहरण के लिए, यदि किसी कंपनी के 100 शेयर हैं और कंपनी लाभ कमाती है, तो लाभ इन 100 शेयरों में समान रूप से वितरित किया जाएगा। लाभ का वितरण पारदर्शी और संबंधित कानूनों का पालन करते हुए होना चाहिए। इसी तरह, यदि किसी कंपनी को घाटा होता है, तो उसके पास अपने निवेशकों को पैसा लौटाने का कोई दायित्व नहीं है; इसलिए, नुकसान निवेशकों को उठाना पड़ता है।

शेयर की कीमतें कंपनी के प्रदर्शन से प्रभावित होती हैं। जब कंपनी का कारोबार बढ़ रहा है और कंपनी मुनाफा कमा रही है, तो कंपनी के प्रत्येक शेयर की कीमतें बढ़ेंगी, जिसके परिणामस्वरूप उसके निवेशकों को लाभ होगा। इसके अलावा, यदि किसी कारण से कंपनी का व्यवसाय खराब प्रदर्शन कर रहा है या सेवाओं या उत्पादों की बिक्री में गिरावट आती है, तो प्रत्येक शेयर का मूल्य घट जाता है जिसके परिणामस्वरूप निवेशकों को नुकसान होता है। एक निवेशक का स्वामित्व प्रतिशत कंपनी द्वारा जारी किए गए कुल शेयरों पर निर्भर करता है। उदाहरण के लिए, यदि किसी निवेशक के पास किसी कंपनी में 10% हिस्सेदारी है, तो हम जरूरी नहीं कह सकते कि वह कंपनी का 10% मालिक है क्योंकि यह इस पर निर्भर करता है कि कंपनी अपने द्वारा जारी किए गए शेयरों को कितना महत्व देती है। उदाहरण के लिए, यदि किसी कंपनी का कुल मूल्य 100 रुपये है, लेकिन उसने 50 रुपये मूल्य के शेयर जारी किए हैं, तो हम कह सकते हैं कि कंपनी के पास अभी भी 50% संपत्ति है। यहां, कंपनी ने अपने शुद्ध संपत्ति मूल्य के 50% मूल्य के शेयर जारी किए हैं, और निवेशक इन 50% शेयरों से खरीदेंगे जो कंपनी द्वारा जारी किए गए हैं। इसलिए, यदि कोई कंपनी द्वारा जारी किए गए कुल शेयरों में से 10% का मालिक है, तो इसका मतलब है कि वह जारी किए गए कुल शेयरों में से 10% का मालिक है, जो कि 5 रुपये होगा। क्योंकि जारी किया गया कुल शेयर 50 रुपये है और 50 रुपये का 10% 5 रुपये है। यह गणना जारी किए गए शेयरों के कुल मूल्य पर आधारित है।

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी)

भारतीय प्रतिभूति (सिक्योरिटीज) और विनिमय बोर्ड (सेबी) की स्थापना 1988 में भारत में स्टॉक और प्रतिभूतियों के लिए एक नियामक निकाय के रूप में की गई थी। सबसे पहले, सेबी को प्रतिभूतियों को विनियमित करने के लिए एक गैर-वैधानिक निकाय के रूप में स्थापित किया गया था। हालाँकि, 30 जनवरी 1992 को, सेबी एक स्वायत्त निकाय बन गया और भारत की संसद द्वारा पारित भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड अधिनियम, 1992 के तहत वैधानिक शक्तियाँ प्राप्त कर लीं।

प्रतिभूतियों के प्रबंधन के लिए सेबी द्वारा स्थापित नियमों और व्यावसायिक दिशानिर्देशों का पालन करने के लिए शेयर बाजार कानूनी रूप से बाध्य हैं। एक्सचेंजों द्वारा उक्त दिशानिर्देशों का अनुपालन न करने पर भारी जुर्माना और विभिन्न कानूनी दायित्व होंगे, क्योंकि सेबी के पास भारत में किसी भी एक्सचेंज के वित्तीय खातों और व्यावसायिक गतिविधियों की जांच करने की शक्ति है। नतीजतन, शेयर बाजार, साथ ही एक्सचेंजों पर शेयरों की बिक्री और खरीद, सेबी द्वारा अत्यधिक विनियमित होती है, जिससे निवेशकों का विश्वास बढ़ता है। सेबी का विनियमन स्टॉक हेरफेर और अंदरूनी व्यापार जैसी अवैध गतिविधियों को रोकने में भी मदद करता है।

कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 56

कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 56 के तहत प्रावधान नीचे उल्लिखित हैं-

कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 56 की उपधारा 1 निर्दिष्ट करती है कि किसी कंपनी को प्रतिभूतियों के हस्तांतरण या शेयरों के हस्तांतरण को पंजीकृत करने का अधिकार नहीं है जब तक कि निक्षेपागार (डिपॉजिटरी) में दोनों पक्षों यानी हस्तांतरणकर्ता (ट्रांस्फरर) और हस्तांतरिती (ट्रांसफरी) के नाम का उल्लेख नहीं किया गया हो। इसके अलावा, अधिनियम कहता है कि उचित हस्तांतरण के लिए हस्तांतरण का एक लिखत (इंस्ट्रूमेंट) आवश्यक है।

लिखत पर मुहर लगी होनी चाहिए और विलेख (डीड) की स्टांप शुल्क का विधिवत भुगतान किया जाना चाहिए। इसे हस्तांतरणकर्ता और हस्तांतरिती दोनों द्वारा उचित रूप से दिनांकित और निष्पादित किया जाना चाहिए। विलेख का निष्पादन हस्तांतरणकर्ता और हस्तांतरिती की ओर से उनके कानूनी प्रतिनिधियों द्वारा भी किया जा सकता है। हस्तांतरण के दस्तावेज में हस्तांतरणकर्ता और हस्तांतरिती दोनों का नाम, पता और व्यवसाय का उचित उल्लेख किया जाना चाहिए। हस्तांतरण के दस्तावेज़ के निष्पादन की तारीख से 60 दिनों के भीतर हस्तांतरणकर्ता या हस्तांतरिती या उनके कानूनी प्रतिनिधियों द्वारा कंपनी कार्यालय में भेजा और वितरित किया जाना चाहिए।

हस्तांतरित किए जाने वाले शेयरों का शेयर प्रमाणपत्र हस्तांतरण के लिखत के साथ संलग्न किया जाना चाहिए और, यदि शेयर प्रमाणपत्र कंपनी द्वारा वितरित नहीं किया जाता है, तो शेयरों के आवंटन का पत्र हस्तांतरण के लिखत के साथ संलग्न किया जाना चाहिए। कंपनी अधिनियम में आगे कहा गया है कि, यदि किसी कारण से हस्तांतरण का लिखत खो जाता है, तो कंपनी कंपनी के बोर्ड सदस्यों से परामर्श करने के बाद भी हस्तांतरण को पंजीकृत कर सकती है। लेकिन, इस मामले में, हस्तांतरणकर्ता और हस्तांतरिती को क्षतिपूर्ति खंड से सहमत होना होगा कि यदि कोई तीसरा पक्ष भविष्य में उक्त हस्तांतरित शेयरों पर दावा करता है, तो इससे होने वाले सभी नुकसान, क्षति और कानूनी खर्च दोनों पक्षों द्वारा वहन किए जाएंगे।

कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 56 की उपधारा 2 कंपनियों को ऐसे व्यक्ति के लिए प्रतिभूतियों के संचरण को पंजीकृत करने का अधिकार देती है जो कंपनी में मृत शेयरधारक का कानूनी उत्तराधिकारी है। कानून के संचालन से ही प्रतिभूति का संचार होगा।

उपधारा 3 में उल्लेख है कि आंशिक रूप से भुगतान किए गए शेयरों के हस्तांतरण के लिए, कंपनी आंशिक रूप से भुगतान किए गए शेयरों की शेष राशि के बारे में हस्तांतरिती को नोटिस भेजने के बाद ही हस्तांतरण को पंजीकृत करेगी, जिसे भविष्य में हस्तांतरिती द्वारा भुगतान किया जाना चाहिए। इसके अलावा, कंपनी से नोटिस प्राप्त करने के बाद, हस्तांतरिती को 14 दिनों के भीतर आंशिक रूप से भुगतान किए गए शेयरों के हस्तांतरण के संबंध में कंपनी को एक एनओसी भेजनी चाहिए।

उपधारा 4 उस समय सीमा का वर्णन करती है जिसके भीतर कंपनी को संबंधित शेयरधारकों को आवंटित शेयरों के प्रमाण पत्र वितरित करने होंगे। समयसीमा नीचे उल्लिखित है:-

  1. कंपनी के सदस्यों के लिए, कंपनी कंपनी के गठन के 60 दिनों के भीतर शेयर प्रमाणपत्र वितरित करेगी।
  2. यदि कंपनी किसी को शेयर आवंटित कर रही है, तो कंपनी को शेयर आवंटन की तारीख से 60 दिनों के भीतर शेयर प्रमाणपत्र वितरित करना होगा।
  3. शेयरों के हस्तांतरण के साथ-साथ शेयरों के संचरण दोनों ही मामलों में, कंपनी 30 दिनों के भीतर शेयर प्रमाणपत्र वितरित करेगी। शेयरों के हस्तांतरण के लिए, 30 दिनों की गणना कंपनी द्वारा हस्तांतरण के लिखत की प्राप्ति की तारीख से की जाती है, और शेयरों के संचरण के मामले में, 30 दिनों की गणना कंपनी द्वारा शेयरों के संचरण के लिए सूचना प्राप्त होने की तारीख से की जाती है।
  4. ऋणपत्र (डिबेंचर) के मामले में, कंपनी ऋणपत्र के आवंटन की तारीख से 180 दिनों के भीतर शेयर प्रमाणपत्र प्रदान करेगी।
  5. यदि किसी कंपनी की प्रतिभूतियां या शेयर किसी निक्षेपागार के तहत पंजीकृत हैं, तो कंपनी निक्षेपागार को शेयरों के आवंटन का विवरण प्रदान करेगी।

उपधारा 5 में कहा गया है कि मृत शेयरधारक के सक्षम कानूनी उत्तराधिकारी या प्रतिनिधि द्वारा किया गया कोई भी हस्तांतरण वैध माना जाता है। भले ही कानूनी उत्तराधिकारी पहले कंपनी का शेयरधारक नहीं है, फिर भी वे शेयरों के हस्तांतरण को अंजाम दे सकते हैं।

कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 56 की उपधारा 1 और उपधारा 5 में उल्लिखित प्रावधानों के साथ किसी भी उल्लंघन या गैर-अनुपालन के मामले में, कंपनी और गैर-अनुपालन में शामिल कंपनी का प्रत्येक अधिकारी 50,000/- रुपये के जुर्माने के लिए उत्तरदायी होगा।

यदि कोई निक्षेपागार या किसी निक्षेपागार का कोई भागीदार गलत इरादे से किसी व्यक्ति को धोखा देता है या शेयरों को अवैध रूप से हस्तांतरित करता है, तो उल्लंघनकर्ता धारा 447 के तहत उत्तरदायी होगा। इस धारा में कहा गया है कि धोखाधड़ी करने वाले व्यक्ति को कम से कम छह महीने की कैद की सजा हो सकती है और इसे दस साल की अवधि तक बढ़ाया जा सकता है। जो व्यक्ति दोषी है उस पर जुर्माना भी लगाया जा सकता है और जुर्माने की न्यूनतम राशि धोखाधड़ी में शामिल राशि है। जुर्माने की राशि को धोखाधड़ी में शामिल राशि के तीन गुना तक बढ़ाया जा सकता है।

निजी कंपनियों में शेयरों का हस्तांतरण

हस्तांतरण के अधिकार पर प्रतिबंध के कारण प्राइवेट लिमिटेड कंपनियों में जारी शेयर विपणन (मार्केटेबल) योग्य नहीं हैं। इसलिए, प्राइवेट लिमिटेड कंपनियों द्वारा जारी किए गए शेयर खुले बाजार में स्वतंत्र रूप से व्यापार योग्य नहीं हैं। किसी निजी कंपनी में शेयरों के हस्तांतरण के अधिकार पर प्रतिबंध के पीछे मुख्य कारण शेयरधारिता की संरचना को संरक्षित करना है।

कंपनी अधिनियम 2013 की धारा 2(68) एक निजी कंपनी में शेयरों के हस्तांतरण को प्रतिबंधित करती है लेकिन यह शेयरों को हस्तांतरित करने के अधिकार पर रोक नहीं लगाती है। एक निजी कंपनी में शेयरों के हस्तांतरण के लिए, आर्टिकल ऑफ एसोसिएशन (एओए) में निहित प्रावधानों और प्रतिबंधों का हस्तांतरणकर्ता और हस्तांतरिती द्वारा विधिवत पालन किया जाना चाहिए।

कंपनी अधिनियम 2013 की धारा 44 में उल्लिखित प्रावधानों के अनुसार, शेयर या ऋणपत्र या अन्य हित चल संपत्ति हैं, जो कंपनी के आर्टिकल ऑफ एसोसिएशन द्वारा प्रदान किए गए तरीके से हस्तांतरणीय हैं। इसलिए, शेयरों के हस्तांतरण के अधिकार पर कोई पूर्ण प्रतिबंध नहीं है। हस्तांतरण का अधिकार आर्टिकल्स में निहित प्रतिबंधों के अधीन है और शेयरों की हस्तांतरणीयता पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं लगाया जा सकता है। हालाँकि, कंपनी हस्तांतरणीयता पर केवल अनुमेय प्रतिबंध ही शामिल कर सकती है।

हालाँकि, निजी कंपनियों में शेयरों के हस्तांतरण पर प्रतिबंध निम्नलिखित मामलों में लागू नहीं हैं-:

  1. यदि शेयरों को शेयरधारकों के प्रतिनिधियों को हस्तांतरित किया जाना है तो कंपनी शेयरों के हस्तांतरण को प्रतिबंधित नहीं कर सकती है।
  2. यदि कानूनी प्रतिनिधि अपने उत्तराधिकारियों के नाम पर शेयरों के पंजीकरण के लिए आगे बढ़ सकता है, जिन्हें शेयर हस्तांतरित किए गए हैं।
  3. उन शेयरों के संबंध में जो आर्टिकल ऑफ एसोसिएशन के आधार पर जारी किए जाने का प्रस्ताव है, मौजूदा सदस्यों को उन्हें आवंटित किए जाने वाले शेयरों को त्यागने का अधिकार है। यदि मौजूदा शेयरधारक किसी भी कारण से अपने शेयर त्याग देता है, तो ये शेयर पहली बार त्यागने वालों को आवंटित किए जाएंगे और इसलिए शेयरों का कोई हस्तांतरण नहीं होगा।

हस्तांतरण के अधिकार पर प्रतिबंध आम तौर पर निम्नलिखित विधि का उपयोग करके लगाया जाता है

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पूर्व-मुक्ति का अधिकार (राइट ऑफ़ प्रीएम्प्शन)

यदि कंपनी का कोई सदस्य अपने कुछ या सभी शेयर बेचना चाहता है, तो ऐसे शेयर पहले कंपनी के अन्य मौजूदा सदस्यों को पेश किए जाएंगे। प्रत्येक शेयर की कीमत कंपनी के निदेशक या लेखा परीक्षक द्वारा निर्धारित की जाएगी। प्रत्येक शेयर की कीमत आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन में उल्लिखित सूत्र का उपयोग करके भी निर्धारित की जा सकती है। यदि कोई मौजूदा सदस्य उन शेयरों को खरीदने के लिए सहमत नहीं है, तो हस्तांतरणकर्ता शेयरों को अपनी पसंद के हस्तांतरिती को हस्तांतरित कर सकता है। एक निजी कंपनी का एक सदस्य पूर्व-मुक्ति खंड (प्री-एम्प्शन क्लॉज) के तहत उसी कंपनी के अन्य सदस्यों को अपने शेयर बेचने के लिए बाध्य नहीं है, जब तक कि कोई अन्य सदस्य बेचे जाने के लिए प्रस्तावित सभी शेयरों को खरीदने के लिए सहमत न हो। पूर्व-मुक्ति खंड हस्तांतरण के अधिकार पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं लगा सकता है, यह हस्तांतरण पर पूरी तरह से रोक नहीं लगा सकता है।

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पूर्व-मुक्ति खंड के तहत शेयरों का मूल्यांकन

एक निजी कंपनी के आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन में प्रावधान है कि शेयरों को कंपनी के निदेशकों या लेखा परीक्षक (ऑडिटर) द्वारा निर्धारित उचित मूल्य पर पूर्व-मुक्ति खंड के तहत बेचा जाना है। यह भी प्रदान किया जा सकता है कि उचित मूल्य कंपनी के लेखा परीक्षक द्वारा प्रमाणित किया जाएगा। यदि पूर्व-मुक्ति खंड के लिए आवश्यक है कि शेयरों को निदेशकों या लेखा परीक्षकों द्वारा प्रमाणित मूल्य पर अन्य सदस्यों को पेश किया जाना आवश्यक है तो न्यायालय भी मूल्यांकन की शुद्धता के बारे में पूछताछ नहीं कर सकता है, जब तक कि सबूत न हो कि मूल्यांकन सही ढंग से नहीं किया गया था। यदि मूल्यांकन करने वाले व्यक्ति ने लापरवाही बरती है और शेयर के मूल्य का निर्धारण करने के लिए सभी आवश्यक डेटा और कारकों को ध्यान में रखने में विफल रहा है, तो ऐसे मामले में हस्तांतरणकर्ता मूल्यांकन करने वाले व्यक्ति पर नुकसान के लिए मुकदमा कर सकता है। मूल्यांकनकर्ता द्वारा निर्धारित शेयर के मूल्य और शेयरों के वास्तविक मूल्य के बीच की राशि के अंतर के लिए क्षतिपूर्ति का दावा किया जाना चाहिए।

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शेयरों के हस्तांतरण के पंजीकरण से इनकार करने की निदेशक की शक्तियां

ये शक्तियां कंपनी के आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन (एओए) में निर्दिष्ट हैं। निदेशक मंडल द्वारा इस शक्ति का प्रयोग सद्भावना से किया जाना चाहिए।

किसी सार्वजनिक कंपनी में शेयरों का हस्तांतरण

कंपनी अधिनियम 2013 की धारा 58 के अनुसार, किसी सार्वजनिक कंपनी में किसी भी सदस्य की प्रतिभूतियाँ या हित स्वतंत्र रूप से हस्तांतरणीय होंगे। सार्वजनिक कंपनी के निदेशक मंडल या निक्षेपागार के पास किसी भी प्रतिभूतियों के हस्तांतरण को अस्वीकार करने या रोकने की कोई शक्ति नहीं है। निजी कंपनी के मामले के विपरीत, सार्वजनिक कंपनी के मामले में कोई पूर्व-मुक्ति खंड नहीं है। लेकिन कंपनी अधिनियम 2013 की धारा 58(2) में कहा गया है कि प्रतिभूतियों के हस्तांतरण के संबंध में 2 या अधिक व्यक्तियों के बीच कोई भी अनुबंध या समझौता एक अनुबंध के रूप में लागू किया जाएगा। संबंधित पक्ष समझौते की शर्तों को भी जोड़ सकते हैं जैसे पहले इनकार का अधिकार, पहले प्रस्ताव का अधिकार, प्रथम प्रस्ताव का अधिकार, फोन का विकल्प, साथ में टैग, रखने का विकल्प आदि। ये शर्तें निवेशकों पर बाध्यकारी होंगी।

शेयरों का हस्तांतरण क्या है?

शेयरों के हस्तांतरण से तात्पर्य तब होता है जब किसी कंपनी में कोई शेयरधारक या शेयरों का मालिक स्वेच्छा से अपने शेयरों या हितों का स्वामित्व अधिकार किसी अन्य व्यक्ति को हस्तांतरित कर देता है। हस्तांतरण का कार्य पूरी तरह से स्वैच्छिक होना चाहिए और हस्तांतरण कंपनी द्वारा विधिवत पंजीकृत होना चाहिए। जो व्यक्ति अपने शेयरों का हस्तांतरण करता है उसे “हस्तांतरणकर्ता” कहा जाता है और जो व्यक्ति उक्त शेयरों को खरीदता है उसे “हस्तांतरिती” कहा जाता है। इसलिए, विक्रेता और क्रेता, यानी हस्तांतरणकर्ता और हस्तांतरिती, दोनों को शेयरों के हस्तांतरण के लिए सहमत होना चाहिए। शेयरों का हस्तांतरण एक प्रतिफल के लिए होना चाहिए, जो बाजार द्वारा निर्धारित होता है। बिना प्रतिफल के, शेयरों का हस्तांतरण अमान्य माना जाएगा।

शेयरों के हस्तांतरण की प्रक्रिया

कंपनी अधिनियम 2013 की धारा 56 की उपधारा 1 में कहा गया है कि किसी कंपनी के पास कोई शेयर पूंजी नहीं होने की स्थिति में कंपनी की प्रतिभूतियों के हस्तांतरण, उन व्यक्तियों के बीच हस्तांतरण के अलावा, कंपनी में किसी सदस्य के हित को पंजीकृत नहीं किया जाएगा, जिनके दोनों नाम निक्षेपागार के रिकॉर्ड में लाभकारी हित धारकों के रूप में दर्ज हैं, जब तक कि हस्तांतरण का एक उचित लिखत, ऐसे प्रारूप में, जैसा कि निर्धारित किया जा सकता है, विधिवत मुद्रांकित, दिनांकित, और और हस्तांतरणकर्ता और हस्तांतरिती द्वारा या उसकी ओर से निष्पादित किया गया है, प्रतिभूतियों से संबंधित प्रमाणपत्र के साथ, या यदि ऐसा कोई प्रमाणपत्र अस्तित्व में नहीं है, तो प्रतिभूतियों के आवंटन पत्र के साथ और हस्तांतरणकर्ता का नाम, पता और व्यवसाय, यदि कोई हो, निर्दिष्ट करते हुए निष्पादन की तारीख से साठ दिनों की अवधि के भीतर हस्तांतरणकर्ता या हस्तांतरिती द्वारा कंपनी को सौंप दिया गया है। उचित हस्तांतरण के लिए, कंपनी अधिनियम 2013 की धारा 56 में प्रक्रियाओं का उल्लेख किया गया है। हस्तांतरणकर्ता, हस्तांतरिती और कंपनी सभी को कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 56 के तहत स्थापित प्रक्रिया का पालन करना होगा। हस्तांतरणकर्ता से हस्तांतरिती को शेयर हस्तांतरित करने के लिए, दोनों पक्षों को कंपनी को हस्तांतरण का लिखत देना आवश्यक है। हस्तांतरण के लिखत के बिना, कोई कंपनी शेयरों के हस्तांतरण को पंजीकृत नहीं करेगी। इसके अलावा, कोई कंपनी स्वयं किसी व्यक्ति के शेयर किसी अन्य व्यक्ति को हस्तांतरित नहीं कर सकती है। इसलिए, उचित हस्तांतरण के लिए उचित कानूनी दस्तावेज और हस्तांतरण का लिखत आवश्यक शर्तें हैं।

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निदेशक मंडल को सूचना भेजना

सबसे पहले, जो व्यक्ति किसी अन्य व्यक्ति या कंपनी के किसी अन्य शेयरधारक को शेयर हस्तांतरित करना चाहता है, उसे कंपनी के निदेशक मंडल को सूचना भेजनी चाहिए। कंपनी से हस्तांतरणकर्ता का अनुरोध लिखित रूप में होना चाहिए, जिसमें यह उल्लेख हो कि हस्तांतरणकर्ता अपने शेयर या उनका कोई हिस्सा बेचना चाहता है। कंपनी के निदेशक मंडल को भेजी गई सूचना सरल और सटीक होनी चाहिए। उदाहरण के लिए, यदि हस्तांतरणकर्ता के पास कंपनी में 100 शेयर हैं और वे उन सभी को बेचना चाहते हैं, तो उन्हें सूचना में उल्लेख करना चाहिए कि वे सभी 100 शेयर बेचना चाहते हैं। और यदि वे 100 शेयरों में से केवल 50 शेयर बेचना चाहते हैं तो उन्हें निदेशक मंडल को सूचित करते हुए शेयरों के विभाजन और हस्तांतरण के बारे में बताना चाहिए। शेयरों का कुल हस्तांतरण और शेयरों के हस्तांतरण के साथ-साथ विभाजन दोनों आसानी से किया जा सकता है, आमतौर पर निदेशक मंडल को इस पर कोई आपत्ति नहीं होती है। किसी निजी कंपनी द्वारा जारी किए गए शेयर हस्तांतरण के अधिकार पर प्रतिबंध के कारण विपणन योग्य प्रतिभूतियाँ नहीं हैं। इसलिए किसी निजी कंपनी द्वारा जारी किए गए शेयर खुले बाजार में स्वतंत्र रूप से व्यापार योग्य नहीं हैं। प्राइवेट लिमिटेड कंपनी में शेयरों के हस्तांतरण पर प्रतिबंध के अधिकार के पीछे मुख्य कारण शेयरधारिता की संरचना को संरक्षित करना है।

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निदेशक मंडल की बैठक

हस्तांतरणकर्ता/हस्तांतरिती/ से सूचना प्राप्त होने के बाद, धारा 173 के अनुसार कंपनी की ओर से कंपनी के सभी सदस्यों और शेयरधारकों को एक नोटिस भेजा जाएगा। कंपनी उल्लेख करेगी कि एक निश्चित संख्या में शेयर बिक्री के लिए उपलब्ध हैं, और इच्छुक खरीदारों को बिक्री के लिए उपलब्ध शेयरों को खरीदने की अपनी इच्छा कंपनी को बतानी चाहिए। यदि कंपनी के आर्टिकल ऑफ एसोसिएशन (एओए) में यह उल्लेख किया गया है कि अपने शेयर बेचने के इच्छुक किसी भी शेयरधारक को पहले उन्हें मौजूदा शेयरधारकों को पेश करना होगा, तो कंपनी अपने सदस्यों और मौजूदा शेयरधारकों को इसके बारे में पूछेगी, सूचित करेगी और प्रस्तावित करेगी। यदि कंपनी का कोई भी शेयरधारक और सदस्य उन उपलब्ध शेयरों को खरीदने की इच्छा नहीं दिखाता है, तो कंपनी किसी बाहरी व्यक्ति को उन शेयरों को खरीदने की अनुमति देगी, जिन्हें विक्रेता बेचना चाहता है। जैसे ही एक सक्षम खरीदार मिल जाता है, हस्तांतरणकर्ता और हस्तांतरिती के बीच एक समझौता होना चाहिए।

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फॉर्म संख्या एसएच4 दाखिल करना

हस्तांतरणकर्ता और हस्तांतरिती दोनों को फॉर्म संख्या एसएच4 भरना होगा। फॉर्म आम तौर पर दो पेज का होता है। पहले पृष्ठ पर, शीर्ष दाएं कोने पर, हस्तांतरण विलेख के निष्पादन की तारीख का उल्लेख किया गया है, जिसे दोनों पक्षों में से किसी एक को भरना होगा। फिर, कंपनी की कॉर्पोरेट पहचान संख्या (बाद में “सीआईएन” के रूप में उल्लिखित) भरनी चाहिए। सीआईएन भारत में पंजीकृत सभी कंपनियों के लिए कंपनी रजिस्ट्रार द्वारा जारी किया जाता है। कंपनी का नाम भी भरना चाहिए, और यदि कंपनी किसी प्रतिभूति या शेयर बाजार में सूचीबद्ध है, तो सीआईएन के नीचे शेयर बाजार का नाम भरना चाहिए।

प्रतिभूति अनुभाग के विवरण में, शेयरधारक द्वारा धारित प्रतिभूतियों का प्रकार और वर्ग भरा जाना चाहिए। आम तौर पर, प्रतिभूतियाँ चार प्रकार की होती हैं, अर्थात् ऋण प्रतिभूतियाँ, व्युत्पन्न (डेरीवेटिव) प्रतिभूतियाँ, इक्विटी प्रतिभूतियाँ और हाइब्रिड प्रतिभूतियाँ। मान लीजिए कि हस्तांतरणकर्ता के पास प्रतिभूतियों का प्रकार और वर्ग इक्विटी प्रतिभूतियां (शेयर) हैं, तो फॉर्म में प्रतिभूतियों के उस प्रकार/वर्ग के तहत इसका उल्लेख किया जाना चाहिए। इसके अलावा, प्रतिभूतियों का विवरण चार खानो में विभाजित है। खानो की सामग्री नीचे उल्लिखित है-:

  • प्रतिभूतियों का प्रकार और वर्ग

पहले खाने में प्रतिभूतियों के प्रकार और वर्ग का उल्लेख किया गया है। प्रतिभूतियाँ चार प्रकार की होती हैं, अर्थात् ऋण प्रतिभूतियाँ, व्युत्पन्न प्रतिभूतियाँ, इक्विटी प्रतिभूतियाँ और हाइब्रिड प्रतिभूतियाँ।

  • अंकित मूल्य

दूसरे खाने में शेयर की प्रत्येक इकाई का नाममात्र मूल्य भरना चाहिए। किसी शेयर का नाममात्र मूल्य प्रत्येक प्रतिभूति की कीमत है जिस पर कंपनी ने पहली बार अपने शेयर जारी किए थे। किसी शेयर का नाममात्र मूल्य बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि इसका उपयोग प्रत्येक शेयरधारक को मिलने वाले लाभ और लाभांश की गणना के लिए किया जाता है।

  • मांगी गई राशि

तीसरे खाने में प्रतिभूति की प्रत्येक इकाई के लिए मांगी गई राशि शामिल है। यह कंपनी द्वारा तय की गई प्रत्येक शेयर की कीमत है। मांगी गई राशि वह न्यूनतम कीमत है जिस पर विक्रेता अपने शेयर बेच सकता है। कंपनी यह कीमत कंपनी के आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन में उल्लिखित आर्टिकल के अनुसार तय करती है।

  • शेयरों के लिए भुगतान की गई राशि

भुगतान की गई राशि उस शेयर की कीमत है जिस पर हस्तांतरणकर्ता अपना हिस्सा हस्तांतरिती को बेच रहा है। शेयर की प्रति इकाई मांगी गई राशि कंपनी द्वारा तय की जाती है, जबकि भुगतान की गई राशि विक्रेता और खरीदार के बीच बातचीत पर निर्भर करती है।

प्रतिभूति खाने के विवरण के नीचे, प्राप्त प्रतिफल के साथ हस्तांतरित प्रतिभूतियों के लिए एक अनुभाग है। प्रतिभूतियों की संख्या अंकों एवं शब्द दोनों में भरी जानी चाहिए। प्रतिभूतियों की संख्या के आगे, हस्तांतरिती से प्राप्त प्रतिफल को भरना चाहिए। पुनः, प्रतिफल राशि को शब्दों और अंकों दोनों में विधिवत भरा जाना चाहिए। उदाहरण के लिए, यदि हस्तांतरित की जाने वाली प्रतिभूतियों या शेयरों की संख्या 10 है और प्रतिभूति की प्रत्येक इकाई के लिए भुगतान की गई राशि 5 रुपये है, फिर प्रतिभूति खाने की संख्या में 10 और प्रतिफल खाने में 50 रुपये भरने चाहिए (क्योंकि प्रत्येक 5 रुपये पर 10 शेयर 50 के बराबर होते हैं)।

उपरोक्त विवरण भरने के बाद, शेयरों की विशिष्ट संख्याएँ भरनी चाहिए। प्रत्येक कंपनी अपने जारी किए गए शेयरों को एक क्रमांक संख्या निर्दिष्ट करती है, और इस क्रमांक संख्या को विशिष्ट संख्या के रूप में जाना जाता है।

उदाहरण के लिए, यदि किसी कंपनी ने 100 शेयर जारी किए हैं और एक शेयरधारक 10 शेयर खरीदता है, तो कंपनी उन 10 शेयरों की निर्दिष्ट क्रमांक संख्या का उल्लेख करेगी। यदि कंपनी ने 70 से 80 तक क्रमांक संख्या वाले शेयर आवंटित किए हैं, तो इसका मतलब है कि 70 से 80 संख्या वाले शेयर शेयरधारक के हैं। विशिष्ट संख्या के नीचे, संबंधित प्रमाणपत्र संख्या भरनी होती है। निवेशकों को शेयर आवंटित करते समय, कंपनी निवेशकों को आवंटित शेयरों के संबंधित प्रमाणपत्र प्रदान करती है। यह एक विशिष्ट पहचान संख्या है और प्रत्येक शेयरधारक के लिए अलग है। संबंधित प्रमाणपत्र पर कंपनी द्वारा हस्ताक्षर किए जाते हैं और यह शेयरधारक को आवंटित शेयरों के स्वामित्व के कानूनी प्रमाण के रूप में भी काम करता है। फॉर्म में फोलियो संख्या भी लिखा हुआ है। फोलियो संख्या एक तरह से शेयरधारक का रोल संख्या होता है जो कंपनी द्वारा उन्हें सौंपा जाता है। यह भी कहा जा सकता है कि फोलियो संख्या कंपनी के साथ शेयरधारक के खाते की पहचान करने वाला अद्वितीय संख्या है। फोलियो संख्या से कई विवरण जुड़े होते हैं जैसे शेयरधारक ने कंपनी में कितना पैसा निवेश किया है, उसके पास कितने शेयर हैं, शेयर व्यापार इतिहास, साथ ही शेयरधारक का संपर्क विवरण। कंपनी के लिए अपने निवेशकों और कंपनी के भीतर उनके लेनदेन का रिकॉर्ड रखने के लिए फोलियो संख्या बहुत उपयोगी होते हैं। फोलियो संख्या कंपनियों को धोखाधड़ी और हेराफेरी जैसी आपात स्थिति में मदद करता है।

हस्तांतरणकर्ता के विवरण में, हस्तांतरणकर्ता का पूरा नाम, आवासीय पता और हस्ताक्षर जैसे विवरण भरे जाने चाहिए। हस्तांतरण विलेख के निष्पादन के लिए एक गवाह भी अनिवार्य है। गवाह का नाम और आवासीय पता भी भरना होगा। गवाह यह स्पष्ट करते हुए अपने हस्ताक्षर करेगा कि शेयर हस्तांतरण का अनुरोध वास्तविक है। गवाह को इस तथ्य से भी सहमत होना चाहिए कि हस्तांतरणकर्ता और हस्तांतरिती दोनों ने उसके सामने फॉर्म पर हस्ताक्षर किए और उसने हस्ताक्षर देखा।

हस्तांतरिती के विवरण पर आते हैं जो फॉर्म का एक बहुत विस्तृत हिस्सा है। हस्तांतरिती का नाम, उसके पिता का नाम, माता का नाम और यदि कोई हो तो पति या पत्नी का नाम भी भरना होगा। फिर, हस्तांतरित व्यक्ति का पता उसके मोबाइल संख्या और ईमेल आईडी के साथ भरना होगा। यदि कंपनी ने उसे कोई फोलियो संख्या दिया है तो हस्तांतरिती का व्यवसाय उसके फोलियो संख्या के साथ विधिवत भरा जाना चाहिए। हस्तांतरिती का स्थायी खाता संख्या (पैन) भरना होगा ताकि आयकर विभाग को हस्तांतरिती के लेनदेन के बारे में अच्छी तरह से सूचित किया जा सके। अंत में, हस्तांतरिती को फॉर्म पर अपना हस्ताक्षर करना चाहिए।

8
शेयरों के हस्तांतरण पर स्टांप शुल्क

हस्तांतरण होने के लिए, स्टांप शुल्क का भुगतान किया जाना चाहिए। चूंकि शेयर चल और व्यापार योग्य संपत्ति हैं, इसलिए भारतीय स्टांप अधिनियम, 1899 के तहत, केंद्र सरकार लिखतो, प्रतिभूतियों और शेयरों के आदान-प्रदान पर स्टांप शुल्क लगाती है। इसके अलावा, कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 44 कंपनी के आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन के अनुसार शेयरों को हस्तांतरित करने की अनुमति देती है। आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन कंपनी को नियंत्रित करने वाले आंतरिक दिशानिर्देशों, नियमों और उपनियमों के अलावा और कुछ नहीं हैं। कंपनी का सारा आंतरिक कारोबार उसके आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन में उल्लिखित आर्टिकल्स के अनुसार किया जाता है।

भारतीय संविधान की अनुसूची 7 की संघ सूची द्वारा सशक्त केंद्र सरकार, शेयरों के हस्तांतरण के लिए हस्तांतरण प्रपत्रों पर शुल्क एकत्र करती है। साथ ही, भारतीय स्टाम्प अधिनियम 1899 की धारा 17 में यह व्यक्त किया गया है कि शुल्क के साथ प्रभार्य (चार्जएबल) और निष्पादित सभी लिखतों पर निष्पादन से पहले या निष्पादन के समय मुहर लगाई जाएगी। जुलाई 2020 में भारतीय स्टाम्प अधिनियम, 1899 में संशोधन के बाद, शेयरों के हस्तांतरण पर स्टाम्प शुल्क की दरों को संशोधित किया गया था। पहले शेयरों के हस्तांतरण के लिए स्टांप शुल्क की दर कुल प्रतिफल मूल्य का 0.25% हुआ करती थी, लेकिन संशोधन के बाद इसे शेयर हस्तांतरण फॉर्म या हस्तांतरण निष्पादन विलेख में उल्लिखित प्रतिफल मूल्य का 0.015% कर दिया गया था। चूंकि भारतीय स्टाम्प अधिनियम, 1899, पूरे भारत में स्टाम्प शुल्क के सभी पहलुओं को नियंत्रित करता है, शेयरों के हस्तांतरण पर देय स्टाम्प शुल्क की दर पूरे देश में एक समान है, वर्तमान में प्रतिफल मूल्य का 0.015% निर्धारित है।

7
हस्तांतरण विलेख के साथ संलग्न किए जाने वाले आवश्यक दस्तावेज़

  • प्रमाणपत्र साझा करें

शेयर हस्तांतरण विलेख के लिए सबसे आवश्यक दस्तावेज हस्तांतरणकर्ता का शेयर प्रमाणपत्र है। शेयर प्रमाणपत्र को शेयर हस्तांतरण फॉर्म या शेयर हस्तांतरण दस्तावेज़ के साथ संलग्न किया जाना चाहिए। कंपनी द्वारा अपने शेयरधारक को एक शेयर प्रमाणपत्र जारी किया जाता है, जो कंपनी के शेयरों पर शेयरधारक के कानूनी स्वामित्व के प्रमाण के रूप में कार्य करता है। यदि शेयर हस्तांतरणकर्ता को वितरित किए जाते हैं तो शेयरों के हस्तांतरण के लिए एक शेयर प्रमाणपत्र अनिवार्य है।

  • शेयरों के आवंटन का पत्र

यदि हस्तांतरणकर्ता ने हाल ही में शेयर खरीदे हैं और कंपनी ने अभी तक शेयरधारक को शेयर प्रमाणपत्र जारी नहीं किया है, तो शेयरों के आवंटन का एक पत्र हस्तांतरण के लिखत के साथ संलग्न किया जाना चाहिए। जब भी किसी व्यक्ति या निवेशक द्वारा शेयरों की एक नई श्रेणी खरीदी जाती है तो शेयरों के आवंटन का एक पत्र प्रदान किया जाता है। यह कंपनी द्वारा अपने शेयरधारकों को दिए गए सत्यापन के रूप में कार्य करता है कि उन्होंने निर्दिष्ट संख्या में शेयर खरीदे हैं और उन शेयरों की वितरण शीघ्र ही होगी। इसलिए, शेयर हस्तांतरण फॉर्म या शेयर हस्तांतरण लिखत के साथ या तो एक शेयर प्रमाणपत्र या शेयरों के आवंटन का पत्र संलग्न किया जाना चाहिए।

  • पैन कार्ड

यदि कंपनी किसी भी स्टॉक या प्रतिभूति एक्सचेंज में सूचीबद्ध है, तो हस्तांतरण के लिखत के साथ पैन कार्ड की एक फोटोकॉपी भी संलग्न की जानी चाहिए।

6
कंपनी को हस्तांतरण विलेख जमा करना

सभी विवरण फॉर्म एसएच4 में भरने के बाद, संलग्न आवश्यक दस्तावेजों के साथ, हस्तांतरण का दस्तावेज हस्तांतरण विलेख के निष्पादन की तारीख से 60 दिनों के भीतर कंपनी कार्यालय में जमा किया जाना चाहिए, या तो हस्तांतरणकर्ता द्वारा या हस्तांतरिती द्वारा। यदि, किसी भी कारण से, पक्ष हस्तांतरण विलेख प्रस्तुत करने में असमर्थ हैं या हस्तांतरण विलेख पारगमन के दौरान खो जाता है या गलत स्थान पर रख दिया जाता है, तब भी कंपनी क्षतिपूर्ति खंड के अधीन हस्तांतरण को पंजीकृत करेगी। क्षतिपूर्ति खंड के तहत, हस्तांतरणकर्ता या हस्तांतरणकर्ता और हस्तांतरिती दोनों द्वारा एक अनुबंध पर हस्ताक्षर किए जाते हैं कि वे कंपनी को तीसरे पक्ष के दावों से उत्पन्न होने वाली लागत और खर्चों के लिए मुआवजा देंगे। यदि कोई तीसरा पक्ष हस्तांतरित शेयरों का दावा करता है, तो क्षतिपूर्ति करने वाला पक्ष यानी, हस्तांतरणकर्ता और हस्तांतरिती, कंपनी द्वारा उठाए गए खर्चों और कानूनी लागतों को वहन करेगा। यहां हस्तांतरणकर्ता और हस्तांतरिती क्षतिपूर्ति करने वाले पक्ष हैं जबकि कंपनी क्षतिपूर्ति पाने वाली पक्ष है। हालाँकि, यह पूरी तरह से बोर्ड के सदस्यों पर निर्भर है कि वे हस्तांतरण के लिखत के बिना शेयर हस्तांतरण को पंजीकृत करेंगे या नहीं।

5
आंशिक रूप से भुगतान किए गए शेयरों के मामले में हस्तांतरण

यदि शेयरों का आंशिक भुगतान किया गया है, जिसका अर्थ है कि हस्तांतरणकर्ता ने कंपनी को शेयरों के लिए पूरा भुगतान नहीं किया है और हस्तांतरिती के साथ हस्तांतरण विलेख में प्रवेश करता है, तो कंपनी तब भी हस्तांतरण की अनुमति देगी। हालाँकि, कंपनी हस्तांतरिती को एक नोटिस भेजेगी, जिसमें हस्तांतरिती से आंशिक रूप से भुगतान किए गए शेयरों की शेष राशि का भुगतान करने का अनुरोध किया जाएगा। इस मामले में, हस्तांतरिती को नोटिस प्राप्त होने की तारीख से 2 सप्ताह (14 दिन) के भीतर कंपनी को अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) भेजना होगा।

शेयरों के हस्तांतरण के प्रभाव

एक बार जब हस्तांतरण फॉर्म निष्पादित हो जाता है और स्टांप शुल्क का भुगतान हो जाता है, तो हस्तांतरणकर्ता और हस्तांतरिती के बीच हस्तांतरण पूरा हो जाता है। तब हस्तांतरिती अपना नाम पंजीकृत सदस्यों में दर्ज करा लेता है। एक बार हस्तांतरण निष्पादित हो जाने के बाद, हस्तांतरणकर्ता पर दायित्व समाप्त हो जाता है और हस्तांतरिती को हस्तांतरित कर दिया जाता है।

हस्तांतरितियों के बीच प्राथमिकता

यदि किसी हस्तांतरणकर्ता ने धोखे से अपने शेयर दो हस्तांतरितियों को बेच दिए तो पहले हस्तांतरण या शेयरों की पहली खरीद को प्राथमिकता दी जाएगी।

शेयरों का संचरण क्या है?

शेयरों के संचरण का अर्थ है कानून के संचालन द्वारा शेयरों के स्वामित्व या शीर्षक का हस्तांतरण। यह आम तौर पर तभी होता है जब शेयरधारक या शेयरों के मालिक की मृत्यु हो जाती है या दिवालिया (इन्सॉल्वेंट) हो जाता है। सामान्यतः शेयरों का संचरण शेयरधारक की मृत्यु के कारण होता है। ऐसे मामलों में, शेयर भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम, 1925 के तहत न्यायालय द्वारा निर्धारित शेयरधारक के सक्षम कानूनी उत्तराधिकारी को हस्तांतरित कर दिए जाएंगे। यदि शेयरधारक के पास कोई वसीयत है, तो न्यायालय उक्त वसीयत के निष्पादन का निर्देश दे सकती है और शेयरों का शीर्षक कंपनी द्वारा सक्षम कानूनी उत्तराधिकारी को हस्तांतरित कर दिया जाएगा।

कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 56 के तहत, एक कंपनी शेयरों के संचरण को पंजीकृत कर सकती है यदि मृत शेयरधारक का सक्षम कानूनी उत्तराधिकारी कंपनी को एक सूचना भेजता है, जिसमें शेयरधारक से उसके कानूनी उत्तराधिकारी को शेयरों के संचरण का अनुरोध किया जाता है। शेयरों के हस्तांतरण के विपरीत, जिसके लिए हस्तांतरण विलेख के निष्पादन और फॉर्म एसएच4 संख्या दाखिल करने की आवश्यकता होती है। शेयरों के संचरण के लिए इन प्रक्रियाओं की आवश्यकता नहीं होती है। आवश्यक दस्तावेजों के साथ शेयरधारक के सक्षम कानूनी उत्तराधिकारी द्वारा कंपनी को एक नोटिस या आवेदन, शेयरों के संचरण के लिए पर्याप्त है।

शेयरों के संचरण के लिए आवश्यक दस्तावेज

4
मृत्यु प्रमाण पत्र की एक फोटोकॉपी

एक मृत्यु प्रमाण पत्र आसानी से एक चिकित्सक द्वारा जारी किया जा सकता है जो बताता है कि किसी व्यक्ति की मृत्यु कब हुई है, या कोई व्यक्ति मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकता है। मृत्यु प्रमाणपत्र में आमतौर पर मृतक की उम्र के साथ-साथ उसकी तारीख और स्थान भी होता है।

3
उत्तराधिकार प्रमाण पत्र

उत्तराधिकार प्रमाणपत्र एक प्रमाणपत्र है जो मृत व्यक्ति के सही और सक्षम कानूनी उत्तराधिकारी को बताते हुए न्यायालय द्वारा जारी किया जाता है। यह तभी मान्य है जब यह न्यायालय द्वारा जारी किया गया हो। उत्तराधिकार प्रमाण पत्र में, न्यायालय व्यक्तिगत उत्तराधिकार कानूनों के अनुसार मृतक के सक्षम कानूनी उत्तराधिकारियों के नामों का उल्लेख करती है।

2
मृतलेख (प्रॉबेट)

यदि कंपनी के मृत शेयरधारक की कोई वसीयत पंजीकृत नहीं है, तो सक्षम कानूनी उत्तराधिकारी को सक्षम क्षेत्राधिकार वाली न्यायालय में वसीयत पंजीकृत करानी चाहिए। फिर वे वसीयत की जांच करेंगे और उस पर मुहर लगाएंगे, इस प्रकार उसे पंजीकृत करेंगे। पंजीकृत वसीयत की प्रमाणित प्रति को मृतलेख के रूप में जाना जाता है। यदि मृत शेयरधारक के कानूनी उत्तराधिकारी के पास मृतलेख है, तो, न्यायालय द्वारा उत्तराधिकार प्रमाणपत्र आवश्यक नहीं है, क्योंकि शेयरों का संचरण पंजीकृत वसीयत द्वारा होगा। लेकिन यदि मृत शेयरधारक ने एक नामांकित व्यक्ति नियुक्त किया है, तो उक्त नामांकित व्यक्ति मृतक के शेयरों का हकदार होगा।

1
सक्षम उत्तराधिकारी के हस्ताक्षर

शेयरों के संचरण के लिए सक्षम कानूनी उत्तराधिकारी के हस्ताक्षर आवश्यक हैं।

शेयरों के संचरण के लिए आवेदन के साथ उपर्युक्त दस्तावेज संलग्न करके, कानूनी उत्तराधिकारी को कंपनी को आवेदन भेजना चाहिए। आवेदन प्राप्त होने के बाद, कंपनी शेयरों का स्वामित्व मृत शेयरधारक से उसके सक्षम कानूनी उत्तराधिकारी को हस्तांतरित कर देगी। शेयरों के संचरण के मामले में, केवल शीर्षक में परिवर्तन होता है, और शेयरों की कोई बिक्री या खरीद नहीं होती है। इसलिए, शेयरों के हस्तांतरण के विपरीत, जहां पक्षों को स्टांप शुल्क का भुगतान करना पड़ता है, शेयरों के संचरण में सरकार को कोई स्टांप शुल्क नहीं देना पड़ता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि यह केवल मृत शेयरधारक से उसके कानूनी उत्तराधिकारी तक स्वामित्व का हस्तांतरण है, इस प्रकार, कोई स्टांप शुल्क या निष्पादित विलेख आवश्यक नहीं है।

शेयरों के हस्तांतरण और संचरण के बीच अंतर

शेयरों के हस्तांतरण और संचरण के बीच प्रमुख अंतर नीचे दिए गए हैं।

अंतर का आधार शेयरों का हस्तांतरण शेयरों का संचरण 
परिभाषा शेयरों के हस्तांतरण का मतलब है कि किसी कंपनी में शेयरों का कोई भी शेयरधारक या मालिक स्वेच्छा से अपने शेयरों या हितों का स्वामित्व अधिकार किसी अन्य व्यक्ति को हस्तांतरित करता है। शेयरों के संचरण का अर्थ है कानून के संचालन द्वारा शेयरों के स्वामित्व या शीर्षक का हस्तांतरण।
शामिल पक्ष शेयरों के हस्तांतरण के लिए हस्तांतरणकर्ता और हस्तांतरिती दोनों की आवश्यकता होती है। शेयरों के संचरण के लिए केवल शेयरधारक के सक्षम कानूनी उत्तराधिकारी की आवश्यकता होती है।
स्वेच्छाधीनता शेयरों को हस्तांतरित करने का कार्य पूरी तरह से स्वैच्छिक है और हस्तांतरणकर्ता और हस्तांतरिती पर निर्भर है। शेयरों के संचरण का कार्य स्वैच्छिक नहीं है और कानून के संचालन द्वारा शासित होता है।
हस्तांतरण का लिखत शेयरों के हस्तांतरण के लिए हस्तांतरणकर्ता और हस्तांतरिती दोनों द्वारा हस्तांतरण के एक उचित लिखत को निष्पादित करने की आवश्यकता होती है। शेयरों के संचरण के मामले में हस्तांतरण के किसी लिखत की आवश्यकता नहीं है।
फॉर्म संख्या एसएच 4 हस्तांतरणकर्ता और हस्तांतरिती दोनों को फॉर्म संख्या एसएच4 भरना चाहिए और शेयर प्रमाणपत्र संलग्न करना चाहिए। संचरण के लिए कानूनी उत्तराधिकारी प्रमाण के साथ केवल एक आवेदन या सूचना पत्र की आवश्यकता होती है; फॉर्म संख्या एसएच4 भरने की कोई आवश्यकता नहीं है।
स्टाम्प शुल्क शेयरों के हस्तांतरण के मामले में स्टांप शुल्क देय है। शेयरों के संचरण के मामले में कोई स्टांप शुल्क देय नहीं है।
दायित्व हस्तांतरिती को शेयर हस्तांतरित होने के बाद हस्तांतरणकर्ता का दायित्व समाप्त हो जाता है। शेयरों के संचरण के मामले में, मूल दायित्व मौजूद रहता है और शेयरधारक का कानूनी उत्तराधिकारी या प्राप्तकर्ता शेयरों के लिए उत्तरदायी होगा।

 

इनकार के विरुद्ध वैधानिक उपाय

कंपनी अधिनियम 2013 की धारा 58 में यह प्रावधान शामिल है कि जब कोई कंपनी प्रतिभूतियों के हस्तांतरण को पंजीकृत करने से इनकार करती है तो इसका पालन किया जाना चाहिए-:

  1. यदि शेयरों द्वारा सीमित कोई निजी कंपनी किसी भी कारण से किसी कंपनी में किसी सदस्य के शेयरों के हस्तांतरण या शेयरों के संचरण को पंजीकृत करने से इनकार करती है, तो कंपनी हस्तांतरणकर्ता या हस्तांतरिती या हस्तांतरणकर्ता और हस्तांतरिती दोनों के कानूनी प्रतिनिधि को नोटिस भेजेगी। नोटिस में, कंपनी हस्तांतरण के पंजीकरण से इनकार करने के कारण का उल्लेख करेगी। कंपनी हस्तांतरण के लिखत या संचरण की सूचना की प्राप्ति की तारीख से तीस दिनों के भीतर इनकार की सूचना भेजेगी।
  2. कंपनी से इनकार के मामले में हस्तांतरिती या हस्तांतरणकर्ता इनकार नोटिस की प्राप्ति की तारीख से तीस दिनों की अवधि के भीतर इनकार के खिलाफ न्यायाधिकरण (ट्रिब्यूनल) में अपील कर सकता है। अगर कंपनी की ओर से कोई नोटिस नहीं भेजा गया है और हस्तांतरण भी नहीं हुआ है तब हस्तांतरणकर्ता या हस्तांतरिती या दोनों के कानूनी प्रतिनिधि को उस तारीख से साठ दिनों की अवधि के भीतर न्यायाधिकरण में अपील करनी चाहिए जिस दिन हस्तांतरण का लिखत या संचरण की सूचना कंपनी को दी गई थी।
  3. यदि कोई सार्वजनिक कंपनी पर्याप्त और वैध कारणों के बिना हस्तांतरण के लिखत या संचरण की सूचना की प्राप्ति की तारीख से तीस दिनों की अवधि के भीतर प्रतिभूतियों के हस्तांतरण को पंजीकृत करने से इनकार करती है, हस्तांतरिती, इनकार नोटिस की प्राप्ति की तारीख से साठ दिनों की अवधि के भीतर, कंपनी द्वारा इनकार के खिलाफ न्यायाधिकरण में अपील कर सकता है। यदि हस्तांतरणकर्ता या हस्तांतरिती को कोई इनकार नोटिस नहीं भेजा गया है तो हस्तांतरिती को कंपनी को हस्तांतरण के लिखत की वितरण की तारीख से नब्बे दिनों के भीतर न्यायाधिकरण में अपील करनी चाहिए।
  4. पक्षों को सुनने के बाद अपील पर विचार करते समय एक न्यायाधिकरण या तो अपील को खारिज कर सकता है या-
  • कंपनी को उक्त हस्तांतरण या संचरण को पंजीकृत करने का निर्देश दें और कंपनी न्यायाधिकरण से आदेश प्राप्त होने के दस दिनों के भीतर हस्तांतरण या संचरण को पंजीकृत करेगी।
  • न्यायाधिकरण रजिस्टर को सुधारने का भी निर्देश दे सकता है और कंपनी को हस्तांतरणकर्ता या हस्तांतरिती या दोनों द्वारा किए गए किसी भी नुकसान के लिए भुगतान करने का भी निर्देश दे सकता है।

हस्तांतरण के पंजीकरण से पहले हस्तांतरणकर्ता या हस्तांतरिती की मृत्यु

ऐसे मामलों में जहां हस्तांतरण के पंजीकरण से पहले हस्तांतरणकर्ता की मृत्यु हो गई है और कंपनी को हस्तांतरणकर्ता की मृत्यु के संबंध में कोई नोटिस नहीं मिला है, तो कंपनी हस्तांतरण को पंजीकृत करेगी। यदि कंपनी को हस्तांतरणकर्ता की मृत्यु की सूचना है तो कंपनी हस्तांतरण को तब तक पंजीकृत नहीं करेगी जब तक कि हस्तांतरणकर्ता के कानूनी प्रतिनिधि को संदर्भित नहीं किया जाता है।

ऐसे मामले में जहां हस्तांतरिती की मृत्यु हो जाती है और कंपनी को उसकी मृत्यु की सूचना है, तो कंपनी मृत हस्तांतरिती के नाम पर शेयरों के हस्तांतरण को पंजीकृत नहीं करेगी। हस्तांतरण का पंजीकरण केवल हस्तांतरणकर्ता और हस्तांतरिती के कानूनी प्रतिनिधि की सहमति से ही हो सकता है। हस्तांतरण के पंजीकरण के संबंध में विवाद की स्थिति में न्यायालय के आदेश की आवश्यकता होगी।

हस्तांतरण विलेख खो गया

कई बार पक्षों द्वारा कंपनी को भेजा गया हस्तांतरण दस्तावेज़ पारगमन के दौरान खो जाता है। इस मामले में, कंपनी अधिनियम 2013 की धारा 56(1) में प्रावधान है कि यदि हस्तांतरण का लिखत खो जाता है या हस्तांतरण का लिखत विलेख के निष्पादन की तारीख से साठ दिनों के भीतर कंपनी को वितरित नहीं किया जाता है, तब कंपनी क्षतिपूर्ति के अधीन हस्तांतरण को पंजीकृत कर सकती है जैसा निदेशक मंडल उचित समझे।

कंपनी हस्तांतरण के लिखत का प्रमाण मांग सकती है। सबूत या तो हस्तांतरणकर्ता द्वारा या हस्तांतरिती द्वारा एक हलफनामे के रूप में हो सकता है। ब्रोकर का बिक्री या खरीद नोट और डाक अधिकारियों द्वारा जारी पंजीकरण रसीद कंपनी को विधिवत प्रदान की जानी चाहिए।

जाली हस्तांतरण

जाली हस्तांतरण तब होता है जब जाली हस्तांतरण विलेख पंजीकरण के लिए कंपनी को प्रस्तुत किया जाता है। संदेह होने पर, कंपनी आम तौर पर हस्तांतरणकर्ता को हस्तांतरण लिखत जमा करने के बारे में एक नोटिस भेजती है ताकि वह चाहे तो हस्तांतरण पर आपत्ति कर सके। कंपनी हस्तांतरणकर्ता को एक समय अवधि की अनुमति देती है जिसके भीतर वह हस्तांतरण पर आपत्ति कर सकता है। यदि हस्तांतरणकर्ता द्वारा कोई आपत्ति नहीं उठाई जाती है तो कंपनी हस्तांतरण को पंजीकृत कर देगी।

जाली हस्तांतरण के परिणाम नीचे उल्लिखित हैं-:

  1. एक जाली हस्तांतरण विलेख, चाहे वह कितना भी वास्तविक क्यों न लगे, अमान्य है। यह कभी भी शीर्षक को एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को हस्तांतरित नहीं कर सकता। इसलिए जाली हस्तांतरण से शेयरों में कोई बदलाव नहीं होता है और यह सही मायने में हस्तांतरणकर्ता का होता है। यदि कोई कंपनी जाली हस्तांतरण दर्ज करती है तो शेयरों का वास्तविक मालिक हस्तांतरण के संबंध में कंपनी को आवेदन कर सकता है और उसका नाम बहाल कर दिया जाएगा। (पीपल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड बनाम वुड एंड कंपनी लिमिटेड)
  2. यदि किसी कंपनी ने हस्तांतरिती को जाली हस्तांतरण में शेयर प्रमाणपत्र जारी किया है और हस्तांतरिती किसी निर्दोष खरीदार को शेयर बेचता है, तो कंपनी ऐसे निर्दोष खरीदार को मुआवजा देने के लिए उत्तरदायी है। कंपनी किसी निर्दोष क्रेता को सदस्य के रूप में अपना नाम दर्ज कराने से इनकार नहीं कर सकती। (बाल्किस कंसोलिडेटेड कंपनी बनाम टॉमकिंसन)
  3. कंपनी के पास जाली हस्तांतरण दर्ज कराने वाले व्यक्ति से नुकसान की वसूली करने का पूरा अधिकार है।

भले ही हस्तांतरिती ने स्टांप शुल्क का भुगतान किया हो और शेयरों के लिए वास्तविक क्रेता हो, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता और हस्तांतरिती उस व्यक्ति को स्क्रिप्ट वापस करने के लिए बाध्य है जिसके पास वह अधिकार है।

कंपनी (शेयर पूंजी और ऋणपत्र) नियम, 2014 के तहत प्रावधान

कंपनी (शेयर पूंजी और ऋणपत्र) नियम, 2014 के अध्याय 4 के नियम 11 के तहत, यह उल्लेख किया गया है कि हस्तांतरण के निष्पादन के लिए हस्तांतरण का एक उचित लिखत आवश्यक है।

नियम 11 के अंतर्गत उल्लिखित प्रावधान निम्नलिखित हैं:-

  1. भौतिक शेयरों के हस्तांतरण के लिए, हस्तांतरण का दस्तावेज फॉर्म संख्या एसएच4 के तहत बनाया जाना चाहिए। इसके अलावा, यह उल्लेख किया गया है कि हस्तांतरण का यह लिखत, जो फॉर्म संख्या एसएच 4 है, लिखत के निष्पादन की तारीख से 60 दिनों के भीतर कंपनी को जमा किया जाना चाहिए।
  2. यदि कंपनी के पास कोई शेयर पूंजी नहीं है और उसने कोई शेयर जारी नहीं किया है, लेकिन कंपनी के सदस्यों को उनके द्वारा निवेश किए गए धन के अनुपात में कंपनी से लाभांश या ब्याज मिलता है, ऐसे मामलों में भी, फॉर्म संख्या एसएच4 के तहत हस्तांतरण का एक लिखत अनिवार्य है।
  3. यदि हस्तांतरण आंशिक रूप से भुगतान किए गए शेयरों के लिए हो रहा है, तो कंपनी फॉर्म संख्या एसएच5 का उपयोग करके हस्तांतरिती को एक नोटिस जारी करेगी, जिसमें उन्हें भविष्य में आंशिक रूप से भुगतान किए गए शेयरों की शेष राशि का भुगतान करने के अपने दायित्व के बारे में सूचित किया जाएगा। कंपनी से नोटिस प्राप्त करने के बाद, हस्तांतरिती को एनओसी के साथ कंपनी को जवाब देना चाहिए कि उसे आंशिक रूप से भुगतान किए गए शेयरों के हस्तांतरण के संबंध में कोई आपत्ति नहीं है। कंपनी से नोटिस प्राप्त होने की तारीख से 14 दिनों के भीतर, हस्तांतरिती को किसी भी आपत्ति या कमी बताते हुए कंपनी को अपना जवाब देना चाहिए।

दंड

कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 56 में शेयरों के हस्तांतरण और शेयरों के संचरण दोनों प्रक्रियाओं को पूरा करते समय दिशानिर्देशों का अनुपालन न करने पर जुर्माने का स्पष्ट उल्लेख है। यदि कोई गैर-अनुपालन होता है, तो कंपनी और गैर-अनुपालन में शामिल कंपनी का प्रत्येक अधिकारी 50,000/- रुपये के जुर्माने के लिए उत्तरदायी होगा।

निष्कर्ष

भारत में स्टॉक और शेयर बाजार काफी तेजी से बढ़ रहा है। लोग इक्विटी में अधिक निवेश कर रहे हैं। कई लोगों के लिए, रियल एस्टेट और अर्थव्यवस्था के अन्य क्षेत्रों में निवेश की तुलना में इक्विटी में निवेश करना अधिक आकर्षक और बेहतर निवेश निर्णय है। चूंकि लोग अपने निवेश पर बेहतर रिटर्न की आकांक्षा रखते हैं, इसलिए वे अपने पैसे पर उन कंपनियों पर भरोसा करते हैं जिनमें वे निवेश करते हैं। कंपनियों के लिए कंपनी अधिनियम के उल्लिखित दिशानिर्देशों का पालन करना और निवेशकों के शेयरों का प्रबंधन करते समय नियमों को सख्ती से लागू करना महत्वपूर्ण है। साथ ही, निवेशकों के लिए उन नियमों और विनियमों की जटिलताओं को जानना बहुत महत्वपूर्ण है जिनके अनुसार कंपनियों द्वारा उनके शेयरों का प्रबंधन किया जा रहा है। शेयरों के हस्तांतरण और संचरण की प्रक्रिया और हस्तांतरण और संचरण दोनों को कैसे निष्पादित किया जाए, यह निवेशकों के साथ-साथ कानूनी पेशेवरों के ज्ञान में अंतर्निहित है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (एफएक्यू)

फॉर्म संख्या एसएच4 क्या है?

फॉर्म संख्या एसएच4 वह फॉर्म है जिसमें हस्तांतरणकर्ता और हस्तांतरिती दोनों को शेयरों के हस्तांतरण के विवरण का उल्लेख करना चाहिए और इस फॉर्म को ही हस्तांतरण का लिखत माना जाएगा।

शेयर प्रमाणपत्र क्या है?

कंपनी द्वारा अपने शेयरधारकों को एक शेयर प्रमाणपत्र जारी किया जाता है, जो कंपनी के शेयर पर शेयरधारक के कानूनी स्वामित्व के प्रमाण के रूप में कार्य करता है। प्रत्येक शेयर प्रमाणपत्र उसके मालिक के लिए अद्वितीय होता है और उस पर कंपनी द्वारा विधिवत हस्ताक्षर और मुहर लगाई जाती है। प्रत्येक शेयर प्रमाणपत्र में एक विशिष्ट संख्या के साथ-साथ एक प्रमाणपत्र संख्या भी होती है, जो कंपनी के प्रत्येक शेयरधारक के लिए अद्वितीय होती है।

फोलियो संख्या क्या है?

फोलियो संख्या कंपनी के साथ शेयरधारक के खाते की पहचान करने वाली अद्वितीय संख्या है। फोलियो संख्या से कई विवरण जुड़े होते हैं, जैसे शेयरधारक ने कंपनी में कितना पैसा निवेश किया है, उसके पास कितने शेयर हैं, निवेशक का शेयर व्यापार इतिहास, साथ ही शेयरधारक का संपर्क विवरण। कंपनी के लिए अपने निवेशकों और कंपनी के भीतर उनके लेनदेन का रिकॉर्ड रखने के लिए फोलियो संख्या बहुत उपयोगी होती हैं। कोई यह कह सकता है कि फोलियो संख्या कंपनियों द्वारा निवेशक को सौंपा गया एक रोल संख्या है।

आर्टिकल ऑफ एसोसिएशन (एओए) क्या है?

किसी कंपनी का आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन (एओए) एक दस्तावेज है जिसमें वे नियम शामिल होते हैं जिनके अनुसार कंपनी को काम करना चाहिए। इसमें यह भी शामिल है कि कंपनी किस प्रकार का कार्य करेगी, कंपनी किस प्रकार की सेवाएँ प्रदान करेगी और कंपनी के आंतरिक प्रशासन के लिए उपनियम भी शामिल है।

हस्तांतरण का लिखत क्या है?

हस्तांतरण का लिखत हस्तांतरणकर्ता से हस्तांतरिती तक शेयरों के हस्तांतरण के लिए एक हस्तांतरण विलेख है। शेयरों के हस्तांतरण के लिए हस्तांतरण का एक लिखत बहुत आवश्यक है। हस्तांतरण का लिखत इस तथ्य के कानूनी साक्ष्य के रूप में कार्य करता है कि हस्तांतरणकर्ता और हस्तांतरिती दोनों शेयरों के हस्तांतरण और इसके निष्पादन के लिए सहमत हैं।

सीआईएन (कॉर्पोरेट पहचान संख्या) क्या है ?

सीआईएन एक अद्वितीय संख्या है जो कंपनी को तब सौंपा जाता है जब वह भारत के कंपनी रजिस्ट्रार के साथ पंजीकृत होती है। सीआईएन कंपनी के लिए बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह भारत सरकार के साथ कंपनी की पहचान के रूप में कार्य करता है। यह 21 अंकों का अल्फ़ान्यूमेरिक कोड है और कंपनियों द्वारा कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय को सौंपी जाने वाली सभी रिपोर्टों में इसका उल्लेख किया जाना चाहिए। सीआईएन का उपयोग सरकार द्वारा कंपनी के व्यवसाय और लेनदेन को ट्रैक करने और रिकॉर्ड बनाए रखने के लिए किया जाता है।

प्रतिस्थापन (ट्रांसपोज़िशन) क्या है?

संयुक्त शेयरधारिता के मामले में, एक या अधिक शेयरधारक कंपनी को कंपनी के सदस्यों के रजिस्टर में उनके नामों के क्रम को बदलने या पुनर्व्यवस्थित करने के लिए सूचित कर सकते हैं। इस प्रक्रिया में शेयर प्रमाणपत्र में उल्लिखित नामों का क्रम भी बदल जाता है। प्रतिस्थापन में, किसी भी शेयरधारक का कोई हित हस्तांतरित नहीं किया जाता है और इसलिए स्टांप शुल्क देय नहीं होता है। कंपनी संबंधित शेयरधारकों को नाम के परिवर्तित क्रमिक आदेशों के साथ नए शेयर प्रमाणपत्र जारी करेगी।

संदर्भ

 

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